मुंबई: शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने उद्योगपति और किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व मालिक विजय माल्या को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ सकती है। राउत ने अपनी आगामी पुस्तक ‘बोध कीर्तन’ में माल्या का बचाव करते हुए लिखा है कि वह कोई फ्रॉड नहीं थे और उन्हें भगोड़ा कहना भी उचित नहीं है। राउत के अनुसार, माल्या का कारोबार डूब गया था और परिस्थितियों के कारण उन्हें देश छोड़ना पड़ा।
माल्या को करीब से जानने का किया दावा
संजय राउत ने पुस्तक के एक अध्याय ‘माल्या ची गोष्ट’ में विजय माल्या के साथ अपने पुराने अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने लिखा है कि संसद और सेंट्रल हॉल में उनकी माल्या से कई बार बातचीत हुई थी। राउत ने उन्हें मिलनसार, उदार और खुले विचारों वाला व्यक्ति बताया है। उनके मुताबिक, माल्या की आलीशान जीवनशैली उनके कारोबारी व्यक्तित्व का हिस्सा थी।
बैंकों को करना चाहिए था माल्या का समर्थन
राउत ने अपनी पुस्तक में सवाल उठाया है कि जब माल्या का कारोबार संकट में था, तब बैंकों ने उनका साथ क्यों नहीं दिया। उन्होंने दावा किया कि माल्या को कर्ज माफी नहीं, बल्कि कुछ समय की राहत और मोहलत की जरूरत थी। राउत ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले वर्षों में कई कारोबारियों को राहत दी गई, लेकिन माल्या के मामले में ऐसा नहीं हुआ।
2019 में भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित हुए थे माल्या
गौरतलब है कि विजय माल्या मार्च 2016 में भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए थे। किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के बैंक कर्ज और कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में भारतीय एजेंसियां उनसे पूछताछ और कानूनी कार्रवाई की मांग कर रही हैं। मुंबई की विशेष अदालत ने जनवरी 2019 में उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था।
पीएम मोदी के भाषणों की भी की तारीफ
संजय राउत ने अपनी पुस्तक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गैर-राजनीतिक भाषणों की भी प्रशंसा की है। ‘दीपस्तंभ’ नाम के अध्याय में उन्होंने लिखा है कि प्रधानमंत्री के गैर-राजनीतिक संबोधन सुनने और पढ़ने योग्य होते हैं। अयोध्या में दीपोत्सव के दौरान भगवान राम पर दिए गए प्रधानमंत्री के भाषण का उल्लेख करते हुए राउत ने उसे भावनाओं से जुड़ा प्रभावशाली संबोधन बताया है।
संजय राउत की पुस्तक ‘बोध कीर्तन’ का विमोचन 31 अक्टूबर को ठाकरे बंधुओं की मौजूदगी में होना प्रस्तावित है। पुस्तक में उनके व्यक्तिगत अनुभवों, राजनीतिक और सामाजिक व्यक्तित्वों से मुलाकातों तथा विचारों को शामिल किया गया है।









