नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार से चार दिवसीय दो देशों की महत्वपूर्ण राजनयिक यात्रा पर रवाना होंगे। इस दौरान वह उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान का दौरा करेंगे। यात्रा का उद्देश्य भारत के विस्तारित पड़ोसी क्षेत्र के साथ रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को और मजबूत करना तथा मध्य एशिया में क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी 29 और 30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। उन्हें उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने आमंत्रित किया है। यह प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा होगी।
ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, डिजिटल संपर्क, ऊर्जा और शिक्षा सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी। दोनों देश दीर्घकालिक विकास के अपने लक्ष्यों में आपसी तालमेल बढ़ाने पर भी विचार करेंगे। इस दौरान भारत के ‘विकसित भारत-2047’ के विजन और उज्बेकिस्तान की ‘उज्बेकिस्तान-2030’ रणनीति के बीच सहयोग की संभावनाओं पर विशेष जोर रहेगा।
प्रधानमंत्री ताशकंद में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके अलावा वह ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज स्थित महात्मा गांधी केंद्र का भी दौरा करेंगे।
एससीओ शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे मोदी
उज्बेकिस्तान की यात्रा पूरी करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचेंगे। किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव के निमंत्रण पर वह 31 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
इस वर्ष एससीओ की स्थापना के 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं। भारत वर्ष 2017 से इस संगठन का पूर्ण सदस्य है। सम्मेलन में क्षेत्र के प्रमुख नेता हिस्सा लेंगे और सुरक्षा, आर्थिक सहयोग तथा क्षेत्रीय संपर्क सहित विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत की प्राथमिकताओं को ‘सुरक्षा, संपर्क और अवसर’ के तीन प्रमुख आधारों के साथ सामने रख सकते हैं। शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे।
किर्गिस्तान यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी छठे विश्व घुमंतू खेलों के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। यह आयोजन मध्य एशिया की समृद्ध सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करता है।
प्रधानमंत्री की यह यात्रा मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके जरिए भारत क्षेत्र में आर्थिक साझेदारी, व्यापारिक संपर्क और सुरक्षा सहयोग को विस्तार देने के साथ-साथ मध्य एशियाई देशों के साथ अपने संबंधों को नई गति देने का प्रयास करेगा।








