मोदी की शिंदे गुट के सांसदों से मुलाकात पर सियासी संग्राम, उद्धव ने उठाए सवाल

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डेस्क : शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उन सांसदों से मुलाकात पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जो उनके गुट से अलग होकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए हैं। ठाकरे ने आरोप लगाया कि एक ओर शिवसेना विभाजन से जुड़ा मामला चार वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री का इन सांसदों से मिलना राजनीतिक रूप से गंभीर संदेश देता है।

ठाकरे ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनकी पार्टी से जुड़े सांसदों की अयोग्यता और नेतृत्व के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अब निर्णायक दौर में पहुंचती दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका और भारत के मुख्य न्यायाधीश पर पूरा भरोसा है, लेकिन प्रधानमंत्री की इन सांसदों से मुलाकात को लेकर उनके मन में सवाल जरूर उठ रहे हैं।

उद्धव ठाकरे ने कहा, “हमारा मामला सुप्रीम कोर्ट में चार साल से लंबित है। अब ऐसा लग रहा है कि सुनवाई अंतिम चरण में पहुंच रही है और लगातार हो रही है। प्रधानमंत्री के पास जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे Gen Z युवाओं से मिलने का समय नहीं है, लेकिन उन्होंने गद्दारों से मुलाकात की।”

‘डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूं’ के संदेश पर सवाल

ठाकरे ने मुलाकात के दौरान कथित तौर पर दिए गए आश्वासन को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि सांसदों को यह संदेश दिया गया कि “डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूं”, तो यह सवाल उठता है कि यह संदेश केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, प्रशासन या उन सभी लोगों के लिए है, जो राजनीतिक दलों में दलबदल करना चाहते हैं।

सुप्रीम कोर्ट पर इस मुलाकात के संभावित प्रभाव से जुड़े सवाल पर ठाकरे ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर विश्वास है और उन्हें उम्मीद है कि मामले पर किसी तरह का प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि, उन्होंने आशंका जताई कि क्या प्रधानमंत्री की मौजूदगी के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि केंद्र सरकार दलबदल करने वाले सांसदों के साथ खड़ी है।

2022 में हुआ था शिवसेना का विभाजन

गौरतलब है कि वर्ष 2022 में शिवसेना दो गुटों में विभाजित हो गई थी। एक गुट का नेतृत्व उद्धव ठाकरे के पास रहा, जबकि दूसरा गुट एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में अलग हो गया। इसके बाद शिंदे गुट ने निर्वाचन आयोग के समक्ष खुद को असली शिवसेना बताते हुए पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न ‘धनुष-बाण’ पर दावा किया था।

पार्टी के विभाजन और विधायकों की अयोग्यता से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। गुरुवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान राजनीतिक दलों के भीतर लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर भी व्यापक सवाल उठाए। पीठ ने टिप्पणी की कि शिवसेना के संविधान में समय के साथ महत्वपूर्ण बदलाव हुए और पार्टी की मूल लोकतांत्रिक संरचना कथित तौर पर एक व्यक्ति-केंद्रित व्यवस्था में बदल गई।

इस मामले में अगली सुनवाई 11 अगस्त को होनी है। ऐसे में प्रधानमंत्री की शिंदे गुट में शामिल सांसदों से हुई मुलाकात ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।

NDA सांसदों के साथ प्रधानमंत्री की बैठक

दरअसल, शुक्रवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित अपने आधिकारिक आवास पर एनडीए के सांसदों के साथ नाश्ते पर मुलाकात की थी। इस बैठक में शिवसेना (यूबीटी) से अलग होकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए पूर्व सांसदों के अलावा कुछ अन्य दलों में शामिल हुए बागी सांसद भी मौजूद थे।

उद्धव ठाकरे ने इस मुलाकात को ऐसे समय में हुई राजनीतिक कवायद बताया है, जब शिवसेना के ‘वास्तविक’ स्वरूप और पार्टी के नाम-चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई निर्णायक दौर में है। उन्होंने आरोप लगाया कि दलबदल करने वाले नेताओं को सार्वजनिक रूप से समर्थन देने से राजनीतिक दलों में दलबदल को बढ़ावा मिलने का संदेश जा सकता है।