नई दिल्ली : तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन के प्रस्तावित विशाल जलविद्युत बांध को लेकर भारत ने एक बार फिर बीजिंग के सामने अपनी चिंता स्पष्ट रूप से रखी है। भारत ने चीन से ब्रह्मपुत्र नदी के पानी के बहाव से संबंधित हाइड्रोलॉजिकल डेटा दोबारा साझा करने और नदी पर बनाई जा रही परियोजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।
यह मुद्दा शुक्रवार को नई दिल्ली में भारत और चीन के बीच हुई 36वीं वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC) की बैठक में प्रमुखता से उठाया गया। भारत ने सीमा-पार बहने वाली नदियों से जुड़े विशेषज्ञ-स्तरीय तंत्र (Expert Level Mechanism) की अगली बैठक जल्द बुलाने की जरूरत पर भी जोर दिया।
2023 से नहीं मिला हाइड्रोलॉजिकल डेटा
भारत की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि चीन ने जून 2023 के बाद से ब्रह्मपुत्र नदी के पानी के बहाव से संबंधित हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा नहीं किया है। भारत का कहना है कि सीमा-पार बहने वाली नदी पर बड़े स्तर की परियोजनाओं के बीच पानी के प्रवाह से जुड़ी सूचनाओं का नियमित आदान-प्रदान बेहद जरूरी है।
यारलुंग त्सांगपो पर बन रहा है दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रो प्रोजेक्ट
चीन तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर दुनिया की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में से एक विकसित कर रहा है। यही नदी भारत में प्रवेश करने के बाद ब्रह्मपुत्र कहलाती है और आगे बांग्लादेश तक जाती है। इस नदी पर निर्भर भारत और बांग्लादेश के बड़े हिस्से के लिए चीन की यह परियोजना रणनीतिक और पर्यावरणीय चिंता का विषय बन गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, इस मेगा प्रोजेक्ट पर चीन करीब 1.2 ट्रिलियन युआन (लगभग 178 अरब डॉलर) खर्च करने की योजना बना रहा है। परियोजना पूरी होने पर इसकी बिजली उत्पादन क्षमता चीन के मौजूदा थ्री गॉर्जेस डैम से कई गुना अधिक हो सकती है।
भारत को किस बात की चिंता?
भारत की मुख्य चिंता यह है कि इतनी बड़ी परियोजना का नदी के पानी के प्रवाह, पर्यावरण और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों पर क्या असर पड़ेगा। ब्रह्मपुत्र का पानी भारत के अरुणाचल प्रदेश और असम समेत कई क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है। इसके बाद नदी बांग्लादेश में प्रवेश करती है।
भारत चाहता है कि चीन इस परियोजना से जुड़े तकनीकी विवरण और संभावित प्रभावों को लेकर पारदर्शिता बरते तथा नदी के बहाव का डेटा नियमित रूप से साझा करे।
सीमा पर शांति बनाए रखने पर भी जोर
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने विवादित सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। भारत और चीन ने बातचीत जारी रखने के लिए मौजूदा राजनयिक और सैन्य माध्यमों का इस्तेमाल करने तथा सीमा पर गलतफहमियों और गलत आकलन से बचने पर भी सहमति जताई।
भारत के लिए ब्रह्मपुत्र का पानी केवल पर्यावरण और जल संसाधन का विषय नहीं, बल्कि सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय रणनीतिक हितों से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में तिब्बत में चीन की मेगा डैम परियोजना के बीच पानी के बहाव का डेटा साझा करने की मांग आने वाले समय में भारत-चीन संबंधों का एक अहम मुद्दा बनी रह सकती है।








