मर्यादा ही संगठन की सबसे बड़ी शक्ति : मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’

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जयपुर : टोंक रोड स्थित न्यूलाइट कॉलोनी के जैन मंदिर में सोमवार को “मर्यादा और संगठन” विषय पर आध्यात्मिक प्रवचन का आयोजन हुआ। इस अवसर पर तेरापंथ धर्मसंघ के संतों ने मर्यादा, अनुशासन और सामूहिक साधना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मर्यादाओं का पालन ही व्यक्ति और संगठन दोनों को सशक्त बनाता है।

प्रवचन के दौरान मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने तेरापंथ धर्मसंघ की मर्यादाओं का वाचन करते हुए कहा कि “मर्यादाएं संगठन की त्राण, प्राण और आधार होती हैं।” उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति मर्यादा का सम्यक् रूप से पालन करता है, वह समाज में सम्मान और विश्वास का पात्र बनता है। साधु-साध्वियां अपनी मर्यादित जीवनशैली के कारण ही पूजनीय और वंदनीय हैं। उन्होंने बताया कि तेरापंथ धर्मसंघ की एकता और अखंडता का मूल आधार उसकी मर्यादा है, जहां एक आचार, एक विचार और एक आचार्य की परंपरा इसकी विशिष्ट पहचान है।

इस अवसर पर मुनिश्री संभव कुमार जी ने कहा कि व्यक्तिगत साधना का अपना महत्व है, लेकिन मर्यादा के साथ समूह में साधना करना अधिक प्रभावशाली होता है। उन्होंने कहा कि उपवास और तपस्या जितने महत्वपूर्ण हैं, उससे भी बड़ी तपस्या एक-दूसरे के स्वभाव को सहन करना है। सहनशीलता ही मर्यादा का वास्तविक स्वरूप है और जो मर्यादावान होता है, वही सच्चे अर्थों में महान बनता है।

कार्यक्रम में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ सभा के मुख्य ट्रस्टी आलोक कुमार हीरावत, मंदिर कमेटी के महामंत्री अभय कुमार चोरड़िया तथा निर्मला जुनीवाल सहित अनेक श्रद्धालुओं ने संतों का स्वागत करते हुए अपने विचार व्यक्त किए।

प्रवचन की शुरुआत तीर्थंकर स्तुति से हुई। इसके पश्चात ध्यान के प्रयोग कराए गए तथा मर्यादा पत्र का सामूहिक वाचन किया गया। मंगलपाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

इससे पूर्व संत द्वय सोमवार प्रातः वसुंधरा कॉलोनी से विहार कर हिम्मत नगर पहुंचे, जहां जतन चंद, आशीष जुनीवाल एवं मनीष जुनीवाल के निवास पर उनका प्रवास हो रहा है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संत मंगलवार को यहां से विहार कर मालवीय नगर के लिए प्रस्थान करेंगे।