डेस्क : इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इजरायल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उन्होंने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर के साथ समारोह में मशाल जलाने का प्रस्ताव भी रखा। यह निमंत्रण दोनों नेताओं के बीच गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को हुई टेलीफोन पर बातचीत के दौरान दिया गया।
नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर बातचीत की जानकारी साझा करते हुए भारत और इजरायल के बीच मजबूत संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान के दौरान सामने आई आपात स्थिति में कैप्टन स्मित मच्छर के साहस की भी सराहना की।
जानिए कौन हैं कैप्टन स्मित मच्छर
कैप्टन स्मित मच्छर उस समय चर्चा में आए, जब 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में उनके सह-पायलट द्वारा कथित हमले की घटना सामने आई। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने स्थिति को संभालने में मदद की। उनके साहस और सूझबूझ ने विमान में मौजूद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को संभावित बड़े हादसे को टालने में मदद की।
विमान की सऊदी अरब के तबुक में आपात लैंडिंग कराई गई। इस घटना के बाद कैप्टन मच्छर के साहस की व्यापक चर्चा हुई और विभिन्न देशों में उनकी प्रशंसा की गई।
नेतन्याहू इससे पहले भी कैप्टन मच्छर से बातचीत कर चुके हैं। उन्होंने उनके साहस को भारत, इजरायल और पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायक बताया था। इसके बाद उन्होंने कैप्टन मच्छर को इजरायल के स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित मशाल प्रज्वलन समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया।
भारत-इजरायल संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा
भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में जारी सकारात्मक प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। दोनों नेताओं ने भारत-इजरायल विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया के ताजा घटनाक्रम पर भी विचार-विमर्श हुआ। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि संवाद और कूटनीति ही आगे बढ़ने का उचित रास्ता हैं।
दोनों नेताओं ने भविष्य में भी संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई।
नेतन्याहू का प्रधानमंत्री मोदी और कैप्टन स्मित मच्छर को दिया गया निमंत्रण भारत-इजरायल के मजबूत संबंधों के साथ-साथ विमानन आपात स्थिति के दौरान भारतीय पायलट के साहस को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान को भी रेखांकित करता है।









