परिसीमन बिल पर हलचल तेज, दो दिन के नोटिस पर बुलाई जा सकती है संसद

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नई दिल्ली : परिसीमन बिल को लेकर केंद्र सरकार की तैयारियों के बीच संसद की बैठक बुलाने की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है। एक सरकारी अधिकारी के अनुसार, यदि संसद के मानसून सत्र का औपचारिक सत्रावसान नहीं हुआ है, तो दो दिन के नोटिस पर भी संसद की बैठक बुलाई जा सकती है। इस घटनाक्रम को परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर सरकार के अगले कदम के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

संसद के दोनों सदनों की बैठक 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी, लेकिन मानसून सत्र का औपचारिक सत्रावसान नहीं हुआ था। ऐसे में मौजूदा सत्र को आगे बढ़ाकर बैठक बुलाने का विकल्प मौजूद है। अधिकारी के मुताबिक, यदि सत्रावसान हो जाता है, तो नया सत्र बुलाने के लिए कम से कम 14 दिन का नोटिस देना होगा।

अप्रैल में पारित नहीं हो पाया था विधेयक

परिसीमन से जुड़े विधेयकों को लेकर अप्रैल में संसद में चर्चा हुई थी। हालांकि, संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई समर्थन नहीं मिलने के कारण विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका। मतदान के दौरान विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया।

अब संसद की बैठक दोबारा बुलाए जाने की संभावना के बीच परिसीमन के मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, संसद की विशेष बैठक बुलाने या विधेयक को दोबारा पेश करने के संबंध में सरकार की ओर से किसी अंतिम निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।

अनुच्छेद 85 के तहत संसद का सत्र

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद के सत्र से संबंधित सवालों पर कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 85 के प्रावधानों का पालन किया जा रहा है। यह अनुच्छेद संसद के सत्र बुलाने, स्थगित करने और सत्रावसान से संबंधित है।

परिसीमन का क्या है महत्व?

परिसीमन के तहत निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जाता है। इससे लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। यह मुद्दा महिला आरक्षण कानून के क्रियान्वयन से भी जुड़ा हुआ है। इस विषय पर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच मतभेद रहे हैं और राज्यों के प्रतिनिधित्व पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर भी बहस होती रही है।

फिलहाल, संसद की बैठक बुलाने को लेकर सरकार के अगले कदम पर नजरें टिकी हैं। यदि बैठक बुलाई जाती है, तो परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर आगे की रणनीति स्पष्ट हो सकती है।