ओवैसी के ‘अब्दुल’ वाले बयान पर सियासी घमासान, कांग्रेस ने तेलंगाना का हिसाब मांगा

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डेस्क : उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समुदाय से अपना राजनीतिक नेतृत्व तैयार करने की अपील को लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी कांग्रेस के निशाने पर आ गए हैं। तेलंगाना कांग्रेस के नेताओं ने ओवैसी से सवाल किया है कि अगर वह मुस्लिम युवाओं को राजनीति में आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं, तो तेलंगाना में उनकी पार्टी ने इस दिशा में क्या काम किया है?

कांग्रेस नेता मोहम्मद वलीउल्लाह समीर ने ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पूछा, “तेलंगाना में अब्दुल का क्या हुआ?” उनका आरोप है कि ओवैसी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समुदाय को स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व तैयार करने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन तेलंगाना में AIMIM का प्रभाव कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित रहा है।

यूपी में ओवैसी की अपील, तेलंगाना में कांग्रेस के सवाल

दरअसल, उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच ओवैसी मुस्लिम समुदाय से नेहरू-गांधी परिवार और यादव नेताओं पर निर्भर रहने के बजाय अपने बीच से नेतृत्व खड़ा करने की अपील कर रहे हैं। रामपुर में एक जनसभा के दौरान उन्होंने कहा था कि मुस्लिम समुदाय के लोगों को केवल दूसरे नेताओं के लिए समर्थन जुटाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें खुद नेतृत्व की भूमिका में आगे आना चाहिए।

ओवैसी ने यह भी कहा कि मुस्लिम युवाओं में नेतृत्व करने की क्षमता है, लेकिन उन्हें पर्याप्त राजनीतिक अवसर और मंच नहीं मिलते। AIMIM प्रमुख के इसी बयान पर तेलंगाना कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं।

AIMIM के नौ सीटों पर चुनाव लड़ने का मुद्दा उठा

कांग्रेस नेता समीर ने 2023 के तेलंगाना विधानसभा चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि राज्य की 119 विधानसभा सीटों में AIMIM ने केवल नौ सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। उन्होंने सवाल किया कि यदि पार्टी मुस्लिम युवाओं को राजनीति में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, तो उसने अन्य सीटों पर भी उम्मीदवार क्यों नहीं उतारे?

समीर ने आरोप लगाया कि AIMIM ने अपने पारंपरिक प्रभाव वाले क्षेत्रों के बाहर नए मुस्लिम नेताओं को व्यापक अवसर नहीं दिए। उन्होंने ओवैसी से यह भी पूछा कि पिछले दो दशकों में पार्टी ने कितने युवा नेताओं, महिलाओं और गरीब व मध्यमवर्गीय परिवारों से आने वाले राजनीतिक कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाया है।

हालांकि, ये कांग्रेस नेता के आरोप और राजनीतिक सवाल हैं। इनसे अपने आप यह साबित नहीं होता कि AIMIM ने अन्य क्षेत्रों में मुस्लिम नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए कोई प्रयास नहीं किया।

मुस्लिम प्रतिनिधित्व पर दोनों पक्षों की राजनीति

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मुस्लिम समुदाय को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, लेकिन यह भी देखा जाना चाहिए कि राजनीतिक दल अपने दावों को जमीन पर किस तरह लागू करते हैं। समीर ने सवाल उठाया कि AIMIM ने मुस्लिम प्रतिनिधित्व का विस्तार पूरे तेलंगाना में किया है या उसका प्रभाव सीमित क्षेत्रों तक ही रहा है।

कांग्रेस नेता शमा मोहम्मद ने भी AIMIM के चुनावी रुख पर सवाल उठाते हुए पूछा कि पार्टी तेलंगाना की सभी 119 सीटों पर चुनाव लड़ने के बजाय केवल नौ सीटों तक क्यों सीमित रही। उनके मुताबिक, अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने से मुस्लिम युवाओं को राजनीतिक अवसर मिल सकते थे।

वहीं, ओवैसी का तर्क है कि मुस्लिम समुदाय में नेतृत्व की क्षमता मौजूद है, लेकिन बड़े राजनीतिक दलों में उसे पर्याप्त अवसर नहीं मिलते। AIMIM खुद को ऐसे मंच के रूप में पेश करती है, जो युवाओं को राजनीति में आगे आने का अवसर देना चाहता है।

राजनीतिक प्रतिनिधित्व की बहस हुई तेज

ओवैसी और कांग्रेस के बीच यह विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व, युवा नेतृत्व और क्षेत्रीय दलों की चुनावी रणनीति से भी जुड़ा है। कांग्रेस जहां ओवैसी से तेलंगाना में अपने राजनीतिक मॉडल का हिसाब मांग रही है, वहीं AIMIM मुस्लिम समुदाय के स्वतंत्र नेतृत्व और राजनीतिक भागीदारी की जरूरत पर जोर देती रही है।

अब इस बहस का केंद्र यह सवाल बन गया है कि मुस्लिम समुदाय के लिए अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व किस तरह सुनिश्चित किया जाए और राजनीतिक दल अपने दावों को कितनी व्यापकता से लागू कर रहे हैं।