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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि पासपोर्ट सेवा कार्यक्रम संस्करण २.० ने भारत की वैश्विक गतिशीलता को मजबूत किया है और यह “विकसित भारत” की परिकल्पना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित वार्षिक क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पासपोर्ट केवल यात्रा दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह आर्थिक अवसरों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और राष्ट्रीय पहचान का एक सशक्त माध्यम है।
जयशंकर ने कहा, “पासपोर्ट सेवा कार्यक्रम २.० ने वास्तव में विकसित भारत के लिए वैश्विक गतिशीलता को नए सिरे से परिभाषित किया है। पासपोर्ट केवल पन्नों की एक पुस्तिका नहीं है, यह आर्थिक गतिशीलता, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और राष्ट्रीय पहचान का एक महत्वपूर्ण साधन है।”
उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय प्रतिभा को वैश्विक स्तर पर लगातार सराहना मिल रही है। हाल ही में यूरोप, जी-७, फ्रांस और स्लोवाकिया की अपनी यात्राओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की कुशल मानवशक्ति के प्रति अंतरराष्ट्रीय सम्मान तेजी से बढ़ रहा है।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की विदेश नीति देश को “विश्व बंधु” के रूप में स्थापित कर रही है और इसी कारण भारतीय पासपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक सम्मान और विश्वास मिल रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पासपोर्ट प्राप्त करने की प्रक्रिया नागरिकों के लिए एक अधिकार के रूप में सरल और सहज बनी रहनी चाहिए, न कि एक कठिन संघर्ष।
उन्होंने बताया कि पासपोर्ट सेवा केंद्रों का व्यापक विस्तार हुआ है। वर्ष २०१४ में जहाँ देश में ७७ पासपोर्ट सेवा केंद्र थे, वहीं आज इनकी संख्या बढ़कर ५४५ हो गई है। उन्होंने इसे विदेश मंत्रालय और डाक विभाग के बीच सफल साझेदारी का परिणाम बताया, जिसने देश के दूरदराज़ क्षेत्रों तक सेवाएँ पहुँचाई हैं।
एस. जयशंकर ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) पोस्ट में भी इस उपलब्धि को साझा किया। उन्होंने लिखा कि भारत की पासपोर्ट सेवा प्रणाली अब देश के सबसे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँच चुकी है और यह नागरिकों को बेहतर सेवा देने का एक सफल मॉडल है।
सम्मेलन में हुई चर्चाओं में सेवा वितरण को और बेहतर बनाने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि जनता से नियमित प्रतिक्रिया लेना ही सेवा सुधार का सबसे प्रभावी तरीका है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया भर के लिए एक वैश्विक कार्यबल तैयार करने में पासपोर्ट सेवाओं की दक्षता और सहजता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


