नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को हैदराबाद हाउस में इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के साथ द्विपक्षीय बैठक की। यह मुलाकात नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर हुई। दोनों नेताओं के बीच भारत और इथियोपिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने तथा सहयोग के नए क्षेत्रों पर चर्चा हुई।
इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद शुक्रवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे थे। हवाई अड्डे पर रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने उनका स्वागत किया। उनके साथ इथियोपिया के विदेश मंत्री गेडियन टिमोथेवोस भी शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं।
भारत और इथियोपिया के बीच आर्थिक संबंधों को बढ़ाने की भी व्यापक संभावनाएं हैं। ब्रिक्स में शामिल होने के बाद इथियोपिया को सदस्य देशों के बड़े बाजारों तक पहुंच मिली है। इससे कॉफी, फूलों और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। भारत और चीन की कुछ कंपनियों ने इथियोपिया के दूरसंचार, प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में निवेश में रुचि भी दिखाई है।
दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग भी लगातार मजबूत हो रहा है। सितंबर की शुरुआत में भारत और इथियोपिया के अधिकारियों ने रक्षा सहयोग बढ़ाने के विभिन्न उपायों पर चर्चा की थी। इसमें सैन्य प्रशिक्षण, रक्षा उत्पादन एवं उद्योग में सहयोग और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भागीदारी जैसे मुद्दे शामिल थे।
भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और 12-13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। भारत की अध्यक्षता का विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” है। विकास, स्थिरता और नवाचार को अध्यक्षता के प्रमुख केंद्रों में रखा गया है।
ब्रिक्स में वर्तमान में 11 देश—ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात—शामिल हैं। समूह में 10 साझेदार देश भी हैं। ब्रिक्स वैश्विक दक्षिण के हितों को आगे बढ़ाने और विकास, वित्त, व्यापार, तकनीक तथा अन्य क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है।
भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता ऐसे समय में हो रही है, जब दुनिया वैश्विक आर्थिक विभाजन, तकनीकी बदलाव, भू-राजनीतिक अनिश्चितता, जलवायु परिवर्तन और संसाधनों से जुड़े दबावों का सामना कर रही है। ऐसे में भारत का जोर विस्तारित ब्रिक्स समूह के बीच व्यावहारिक सहयोग और ठोस परिणामों पर है।








