‘पिया घर आवेंगे’ की अनसुनी कहानी, कैलाश खेर ने खोला राज

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डेस्क : शादियों में दुल्हन की एंट्री और जयमाला के दौरान अक्सर सुनाई देने वाला कैलाश खेर का मशहूर गीत ‘आज मेरे पिया घर आवेंगे’ दरअसल शादी या प्रेम कहानी को ध्यान में रखकर नहीं लिखा गया था। कैलाश खेर ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में इस गीत के पीछे की भावुक कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि इस गीत की प्रेरणा उन्हें अपने पिता के देवलोक गमन के समय मिली थी।

कैलाश खेर के अनुसार, उनके पिता ध्यान और आध्यात्मिक साधना करते थे। अंतिम समय में वे लगातार भगवान का नाम ले रहे थे। कैलाश ने बताया कि उन्होंने अपने पिता को उस अवस्था में देखा, जब उनके चेहरे पर शांति और आनंद था। पिता के निधन के बाद इसी अनुभव को उन्होंने गीत के शब्दों में पिरोया।

गीत के बोल ‘आज मेरे पिया घर आवेंगे’ और ‘हे री सखी मंगल गाओ री’ सुनने में भले ही विवाह और दूल्हा-दुल्हन के मिलन जैसे लगते हैं, लेकिन कैलाश खेर ने इसका अर्थ आत्मा और परमात्मा के मिलन से जोड़ा है। उनके मुताबिक, यह गीत उस आध्यात्मिक अनुभूति को व्यक्त करता है, जिसमें आत्मा अपने परमात्मा से मिलने की ओर बढ़ती है।

पिता की गोद में ली अंतिम सांस

कैलाश खेर ने बताया कि उनके पिता ने उनकी गोद में अंतिम सांस ली थी। उनके पिता के देहांत के दिन ही कैलाश का एक शो भी था। पिता के अंतिम संस्कार के बाद उन्होंने शाम को मंच पर प्रस्तुति दी। इस व्यक्तिगत अनुभव ने उनके लिए इस गीत को और भी खास बना दिया।

‘पिया घर आवेंगे’ वर्ष 2009 में कैलाश खेर के एल्बम ‘चांदन में’ का हिस्सा बनकर सामने आया था। समय के साथ इसके बोल और धुन ने इसे शादी समारोहों, खासकर ब्राइडल एंट्री के लिए लोकप्रिय बना दिया।

आज जिस गीत को लोग विवाह के उत्सव से जोड़कर सुनते हैं, उसके पीछे कैलाश खेर के लिए पिता की स्मृति, आध्यात्मिक अनुभूति और आत्मा-परमात्मा के मिलन की गहरी भावना जुड़ी हुई है।