परीक्षा पत्र लीक से लेकर शिक्षा बजट तक, मुरली मनोहर जोशी ने सरकार को घेरा

0

डेस्क : भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की शिक्षा नीति, बजट और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक साक्षात्कार में उन्होंने परीक्षा पत्र लीक होने की घटनाओं, शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण, शिक्षा बजट में कमी और विकसित भारत की अवधारणा को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।

डॉ. जोशी ने परीक्षा पत्र लीक होने की घटनाओं को केवल परीक्षा व्यवस्था की विफलता मानने से इनकार करते हुए इसे समाज और शासन में बढ़ते भ्रष्टाचार से जोड़ा। उन्होंने कहा कि जब छात्रों को दिखाई देता है कि शिक्षकों की नियुक्तियों में रिश्वत चल रही है और हर क्षेत्र में पैसे का प्रभाव बढ़ रहा है, तो उन पर भी इसका गलत असर पड़ता है।

उन्होंने सवाल उठाया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में परीक्षा पत्र लीक होने की घटनाएं क्यों नहीं होती थीं। जोशी ने कहा कि आज बैंकिंग और व्यापार के क्षेत्र में घोटाले हो रहे हैं और सरकार खुद घोटालों में फंसी हुई है। इसका प्रभाव शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों पर भी पड़ता है।

शिक्षा बजट में कमी पर चिंता

डॉ. जोशी ने सरकार की बजट प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि प्राथमिक शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए बजट लगातार कम हो रहा है, जबकि सड़कों और सड़क परिवहन पर खर्च बढ़ाया जा रहा है। उनके अनुसार केवल सड़कें बना देना विकास नहीं है। सड़कों के निर्माण के लिए अभियंता और मशीनें चाहिए और इसके लिए मजबूत शिक्षा व्यवस्था जरूरी है।

उन्होंने शिक्षा और चिकित्सा के बढ़ते व्यवसायीकरण पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि शिक्षा और चिकित्सा केवल लाभ कमाने का साधन नहीं होनी चाहिए। निजी क्षेत्र को इन क्षेत्रों में आने की अनुमति हो, लेकिन अपनी कमाई का एक हिस्सा शिक्षा के विकास में भी लगाया जाना चाहिए।

विकसित भारत की अवधारणा पर भी सवाल

विकसित भारत के लक्ष्य पर डॉ. जोशी ने कहा कि विकास का आकलन केवल आधुनिक मानकों से नहीं किया जाना चाहिए। मानवीय जीवन मूल्यों और प्रकृति के साथ संतुलन को भी विकास का आधार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ रहने वाले आदिवासी समुदायों की जीवनशैली को भी विकसित जीवन का उदाहरण माना जा सकता है।

नई शिक्षा नीति पर भी उठाए सवाल

नई शिक्षा नीति पर चर्चा करते हुए डॉ. जोशी ने कहा कि किसी नीति को केवल इसलिए नहीं बदला जाना चाहिए कि वह पिछली सरकार के कार्यकाल में बनी थी। उन्होंने नई शिक्षा नीति के निर्माण में नीति आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने सभी बच्चों के लिए समान और निःशुल्क प्रारंभिक शिक्षा की वकालत करते हुए पड़ोस के विद्यालय की व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि अमीर और गरीब सभी बच्चों को शुरुआती स्तर पर समान अवसर मिलना चाहिए।