डेस्क : पटना हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए महिला को तलाक की मंजूरी दे दी है। साथ ही, उसके पति को तीन महीने के भीतर 50 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता (एलिमनी) के रूप में देने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें संबंधित कानून का गलत इस्तेमाल करते हुए महिला की तलाक याचिका खारिज कर दी गई थी।
न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने पांच अक्टूबर को महिला की अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि फैमिली कोर्ट के न्यायाधीश ने ईसाई दंपतियों के तलाक से संबंधित सही कानून लागू करने के बजाय दूसरे कानून के प्रावधानों के आधार पर फैसला दिया। हाईकोर्ट ने इस चूक को गंभीर लापरवाही बताया।
शादी के दो महीने बाद ही अलग हो गए थे पति-पत्नी
मामले के अनुसार, महिला की शादी जनवरी 2010 में ईसाई रीति-रिवाजों के अनुसार हुई थी। मार्च 2010 में ही पति-पत्नी अलग हो गए। महिला ने पति पर क्रूरता और घर में काम करने वाली महिला के साथ अवैध संबंध होने के आरोप लगाए थे। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि वह व्यभिचार के आरोप को साबित नहीं कर सकी। इसके बावजूद अदालत ने परित्याग के आधार पर विवाह विच्छेद की उसकी मांग स्वीकार कर ली।
गलत कानून लागू करने पर फैमिली कोर्ट को फटकार
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारत में ईसाई दंपतियों के तलाक के मामलों में भारतीय तलाक अधिनियम, 1869 लागू होता है। फैमिली कोर्ट ने इसके बजाय भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम, 1872 के प्रावधानों के आधार पर याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा कि लागू कानून की जांच किए बिना फैसला सुनाना गंभीर न्यायिक चूक है। इसी आधार पर निचली अदालत का आदेश निरस्त कर दिया गया।
पति को तीन महीने में देने होंगे 50 लाख रुपये
स्थायी गुजारा भत्ता तय करते समय हाईकोर्ट ने पति की आय, किराये से होने वाली कमाई और संपत्ति को ध्यान में रखा। अदालत ने कहा कि महिला के पास आय का स्वतंत्र स्रोत नहीं है और वह अपने माता-पिता के परिवार पर निर्भर है। ऐसे में उसके जीवन-यापन के लिए 50 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता के रूप में दिए जाने का आदेश दिया गया।
अदालत के अनुसार, पति को यह राशि तीन महीने के भीतर चुकानी होगी। भुगतान के बाद उसे पत्नी को अलग से मासिक गुजारा भत्ता देने की आवश्यकता नहीं रहेगी। हाईकोर्ट के इस फैसले से महिला को तलाक के साथ आर्थिक सहायता भी मिलेगी।








