पवार के कुनबे में बड़ा फेरबदल, एक झटके में सभी प्रवक्ताओं की छुट्टी

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डेस्क: महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के भीतर बड़े संगठनात्मक बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। पार्टी ने एक साथ अपने सभी प्रवक्ताओं की नियुक्तियां रद्द कर दी हैं। मंगलवार रात पार्टी नेता शशिकांत शिंदे की ओर से जारी प्रेस नोट के जरिए यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू किया गया। हालांकि, प्रवक्ताओं को हटाने की वजह पार्टी की ओर से स्पष्ट नहीं की गई है।

पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, यह कदम संगठन में चल रहे फेरबदल का हिस्सा हो सकता है। एक पूर्व प्रवक्ता ने भी इस फैसले पर हैरानी जताते हुए कहा कि उन्हें अचानक लिए गए निर्णय की जानकारी नहीं थी। माना जा रहा है कि पार्टी जल्द ही नए प्रवक्ताओं की नियुक्ति कर सकती है।

फिलहाल दो नेता संभालेंगे जिम्मेदारी

नई नियुक्तियां होने तक महाराष्ट्र विधान परिषद की पूर्व सदस्य विद्या चव्हाण और पार्टी नेता महेश तापसे मीडिया के सामने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) का पक्ष रखेंगे। पार्टी ने फिलहाल इन्हीं दोनों नेताओं को अधिकृत रूप से यह जिम्मेदारी दी है।

पहले भी हुए हैं संगठन में बदलाव

प्रवक्ताओं की नियुक्तियां रद्द करने से पहले भी पार्टी पिछले कुछ समय में संगठन स्तर पर कई बदलाव कर चुकी है। शशिकांत शिंदे को पार्टी की छात्र इकाई की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं विशाल वाकडकर को युवा मोर्चे और राम राठौड़ को शिक्षक प्रकोष्ठ का प्रमुख बनाया गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि पार्टी संगठन में आने वाले दिनों में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, इसे लेकर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।

परीक्षा में अनियमितता का मुद्दा भी उठा रही पार्टी

संगठन में यह फेरबदल ऐसे समय हुआ है, जब शरद पवार की पार्टी महाराष्ट्र में परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार पर हमलावर है। विधायक रोहित पवार ने एमएचटी-सीईटी परीक्षा को लेकर सवाल उठाते हुए राज्य के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने का आरोप भी लगाया है और मामले में आगे की कार्रवाई की बात कही है।

फिलहाल सभी प्रवक्ताओं को हटाने के फैसले ने पार्टी के भीतर चल रहे संगठनात्मक बदलावों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस फेरबदल के पीछे किसी बड़े राजनीतिक फैसले या बदलाव की पुष्टि नहीं की गई है।