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डेस्क : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि छात्रों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है और शिकायत करने वालों को निशाना बनाया जा रहा है।
राहुल गांधी ने कहा कि एक 17 वर्षीय छात्र, जिसकी उत्तरपुस्तिका के मूल्यांकन में कथित त्रुटि हुई थी, उसने सोशल मीडिया पर न्याय की मांग की, लेकिन मदद मिलने के बजाय उसे अपमान और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित छात्र को “राष्ट्रविरोधी”, “सोरस एजेंट” और “डीप स्टेट” का हिस्सा बताकर बदनाम किया गया।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि देशभर में लाखों छात्र सीबीएसई की मूल्यांकन प्रणाली, ओएसएम तकनीक और अंकन प्रक्रिया को लेकर शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन सरकार और शिक्षा मंत्रालय की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने इसे छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय करार दिया।
राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी कहा कि सरकार युवाओं की आवाज से डरती है और सवाल पूछने वालों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने सरकार पर संस्थागत व्यवस्था को कमजोर करने और परीक्षा प्रणाली में “गड़बड़ी” को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।
इस बीच, सीबीएसई से जुड़े आंकड़ों को लेकर भी चर्चा तेज है। वर्ष 2023 में पास प्रतिशत 87.33 रहा, 2024 में यह बढ़कर 87.98 प्रतिशत और 2025 में 88.39 प्रतिशत तक पहुंचा। लेकिन 2026 में इसमें गिरावट दर्ज की गई और यह 85.20 प्रतिशत पर आ गया, जब बोर्ड ने नई ओएसएम प्रणाली लागू की थी।
विवाद और अभिभावकों की शिकायतों के बीच सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि स्कैन कॉपी आवेदन प्रक्रिया में तकनीकी खामियों के कारण कुछ छात्रों से अतिरिक्त शुल्क काट लिया गया था, जिसे वापस किया जाएगा। साथ ही, स्कैन कॉपी आवेदन की अंतिम तिथि 24 मई से बढ़ाकर 25 मई 2026 की मध्यरात्रि तक कर दी गई है।
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