नई दिल्ली : भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर वैश्विक स्तर पर भरोसा बढ़ा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के सितंबर के चीफ इकोनॉमिस्ट आउटलुक के अनुसार, अगले 12 महीनों में भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर विशेषज्ञों का नजरिया मजबूत हुआ है। सर्वे में शामिल 98 प्रतिशत मुख्य अर्थशास्त्रियों ने भारत की आर्थिक वृद्धि मध्यम या उससे बेहतर रहने की उम्मीद जताई है। वहीं, 74 प्रतिशत विशेषज्ञों ने मजबूत या बहुत मजबूत वृद्धि का अनुमान लगाया है। मई में यह आंकड़ा 52 प्रतिशत था।
WEF के सर्वे में भारत को शामिल किए गए क्षेत्रों में सबसे मजबूत आर्थिक वृद्धि वाले देशों में रखा गया है। अगस्त में WEF ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, मजबूत घरेलू मांग और उपभोग भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं। हालांकि, ऊर्जा की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव भारत की आर्थिक संभावनाओं के लिए प्रमुख जोखिम बने हुए हैं। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर भारत जैसे बड़े आयातक देश पर पड़ सकता है।
चीन की आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंता
सर्वे में चीन की अर्थव्यवस्था को लेकर विशेषज्ञों का भरोसा कुछ कमजोर हुआ है। करीब एक-तिहाई मुख्य अर्थशास्त्रियों ने चीन में कमजोर आर्थिक वृद्धि की संभावना जताई है। वहीं, यूरोप को लेकर स्थिति और कमजोर दिखाई दी। करीब 61 प्रतिशत विशेषज्ञों ने यूरोप में कमजोर या बहुत कमजोर आर्थिक वृद्धि का अनुमान व्यक्त किया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था के आउटलुक में सुधार
वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर भी विशेषज्ञों का नजरिया पहले की तुलना में बेहतर हुआ है। सर्वे में 56 प्रतिशत मुख्य अर्थशास्त्रियों ने अगले एक साल में वैश्विक आर्थिक स्थिति स्थिर रहने या बेहतर होने की उम्मीद जताई। मई में ऐसा मानने वाले विशेषज्ञों की संख्या केवल 11 प्रतिशत थी।
हालांकि, वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने जोखिम अभी भी बने हुए हैं। करीब 97 प्रतिशत विशेषज्ञों ने भू-राजनीतिक संघर्षों को अगले एक साल में अनिश्चितता का प्रमुख स्रोत माना है। वहीं, 58 प्रतिशत विशेषज्ञों ने परिसंपत्तियों की कीमतों में गिरावट की आशंका जताई।
7.8 प्रतिशत रही भारत की जीडीपी वृद्धि
WEF का सर्वे अप्रैल-जून तिमाही के ताजा जीडीपी आंकड़े जारी होने से पहले किया गया था। बाद में जारी आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही, जो अनुमान से बेहतर थी। घरेलू मांग और मजबूत उपभोग को आर्थिक वृद्धि का प्रमुख आधार माना जा रहा है।
हालांकि, मजबूत आर्थिक वृद्धि के बावजूद भारत के कारोबारी माहौल को लेकर विशेषज्ञों की राय में कुछ बदलाव आया है। मई के सर्वे में भारत को शीर्ष तीन पसंदीदा कारोबारी गंतव्यों में शामिल करने वाले विशेषज्ञों की संख्या 56 प्रतिशत थी, जो सितंबर में घटकर 40 प्रतिशत रह गई। इससे संकेत मिलता है कि भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर भरोसा मजबूत बना हुआ है, लेकिन कारोबारी माहौल को लेकर कुछ चिंताएं भी मौजूद हैं।








