“राहुल से परहेज नहीं, अधीर बने रोड़ा”: कल्याण बनर्जी

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डेस्क : पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। नंदीग्राम सीट पर तृणमूल कांग्रेस (ममता गुट) ने कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन देने का ऐलान किया है। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच टीएमसी के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी ने एक साक्षात्कार में खुलकर बताया है कि आखिर बंगाल में कांग्रेस और टीएमसी के बीच एक मजबूत गठबंधन क्यों नहीं बन पा रहा है।

अधीर चौधरी पर साधा निशाना, बताया ‘भाजपा का आदमी’ राष्ट्रीय स्तर पर ‘INDIA’ गठबंधन के नेतृत्व और एकजुटता पर बात करते हुए कल्याण बनर्जी ने कहा कि टीएमसी को राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के नेतृत्व से कोई परहेज नहीं है। उन्होंने खुलासा किया कि गठबंधन की आखिरी बैठक में खुद ममता बनर्जी ने कांग्रेस से नेतृत्व संभालने का आग्रह किया था, लेकिन कांग्रेस की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला।

सांसद बनर्जी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तारीफ करते हुए कहा, “राहुल गांधी अच्छा काम कर रहे हैं और वह ममता दी के लगातार संपर्क में हैं। राहुल गांधी ईमानदारी से ‘INDIA’ अलायंस को आगे बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में सबसे बड़ी समस्या अधीर रंजन चौधरी हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि अधीर रंजन चौधरी का एकमात्र राजनीतिक एजेंडा ममता बनर्जी का विरोध करना है। वह भाजपा या सीपीएम के खिलाफ नहीं लड़ रहे, बल्कि परोक्ष रूप से भाजपा की मदद कर रहे हैं। बनर्जी ने अधीर चौधरी और पूर्व विधायक अब्दुल मन्नान पर गठबंधन की राह में रोड़ा अटकाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब यह पश्चिम बंगाल कांग्रेस को तय करना है कि वह क्या रुख अपनाती है।

नंदीग्राम में टीएमसी ने कांग्रेस को दिया समर्थन नंदीग्राम सीट के सियासी गणित पर बोलते हुए कल्याण बनर्जी ने कहा, “हमने नंदीग्राम सीट कांग्रेस के लिए छोड़ दी है। शुभेंदु अधिकारी की साजिश के कारण हमारे उम्मीदवार को नाम वापस लेना पड़ा, जिसके बाद हमने वहां कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन देने का फैसला किया है।”

चुनाव चिन्ह फ्रीज होने से ममता गुट संकट में गौरतलब है कि यह उपचुनाव ममता बनर्जी गुट के लिए बेहद संवेदनशील समय पर हो रहा है। पार्टी के अंदरूनी विवाद और अरूप रॉय गुट के अलग होने के बाद निर्वाचन आयोग ने टीएमसी के मूल नाम और उसका पारंपरिक ‘दो फूल’ वाला चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया है। चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के रूप में नई पहचान देते हुए ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया है।

1998 में पार्टी के गठन के समय से जुड़ा अपना मूल प्रतीक चिन्ह छिन जाने के बाद ममता गुट ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस याचिका में ऋताब्रत बनर्जी को भी प्रतिवादी बनाया गया है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने अभी तक इस मामले पर सुनवाई की तारीख तय नहीं की है। नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि मतों की गिनती 9 अक्टूबर को की जाएगी।