रामानंद सागर की ‘रामायण’ में ऐसे उड़ता था पुष्पक विमान, जानिए शूटिंग का पूरा तरीका

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डेस्क : टेलीविजन की दुनिया में रामानंद सागर की ‘रामायण’ को आज भी एक ऐतिहासिक धारावाहिक के रूप में याद किया जाता है। वर्ष 1987 में प्रसारित इस सीरियल ने सीमित तकनीकी संसाधनों के बावजूद ऐसे दृश्य प्रस्तुत किए, जिन्होंने दर्शकों के मन पर गहरी छाप छोड़ी। इन्हीं में से एक था रावण का पुष्पक विमान, जिसे पर्दे पर उड़ता हुआ दिखाने के लिए निर्माताओं ने पारंपरिक फिल्मांकन तकनीकों का सहारा लिया था।

आज जहां फिल्मों और धारावाहिकों में कंप्यूटर जनित दृश्य (CGI) और विजुअल इफेक्ट्स (VFX) का व्यापक इस्तेमाल होता है, वहीं उस दौर में ऐसे दृश्य तैयार करना किसी चुनौती से कम नहीं था। इसके बावजूद रामानंद सागर की टीम ने अपनी रचनात्मकता और तकनीकी कौशल से पुष्पक विमान को दर्शकों के सामने जीवंत कर दिया।

डिजाइन तैयार करने में हुई थी खास मेहनत

‘रामायण’ में लक्ष्मण की भूमिका निभाने वाले अभिनेता सुनील लहरी ने एक इंटरव्यू में पुष्पक विमान से जुड़े निर्माण कार्य और शूटिंग की प्रक्रिया के बारे में जानकारी साझा की थी। उनके अनुसार, विमान का डिजाइन तैयार करना टीम के लिए एक अहम काम था। पौराणिक वर्णनों को ध्यान में रखते हुए इसके अलग-अलग डिजाइन बनाए गए और उनमें से एक को अंतिम रूप दिया गया।

चयनित डिजाइन के आधार पर पुष्पक विमान का मॉडल तैयार किया गया। इसे इस तरह बनाया गया था कि वह रावण के राजसी व्यक्तित्व और पौराणिक कथा के अनुरूप दिखाई दे।

जमीन से कुछ फीट ऊपर रखकर हुई शूटिंग

पुष्पक विमान को वास्तविक रूप से आसमान में उड़ाने के बजाय शूटिंग के दौरान एक विशेष व्यवस्था के तहत जमीन से लगभग चार फीट ऊपर रखा गया था। इसके बाद ब्लू स्क्रीन और क्रोमा तकनीक की सहायता से दृश्य फिल्माया गया।

शूटिंग के दौरान विमान और कलाकारों के दृश्य रिकॉर्ड किए गए। फिर अलग-अलग फुटेज को संपादन के जरिए जोड़ा गया, जिससे विमान के उड़ने का प्रभाव पैदा हुआ। इस तकनीक ने सीमित संसाधनों के बीच एक कल्पनात्मक दृश्य को पर्दे पर उतारने में अहम भूमिका निभाई।

उस समय आज जैसी उन्नत डिजिटल तकनीक उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में मॉडल निर्माण, कैमरे की स्थिति, पृष्ठभूमि और संपादन के तालमेल से दृश्य को प्रभावशाली बनाने की कोशिश की जाती थी।

आधुनिक फिल्मों में बदल गई पुष्पक विमान की कल्पना

पुष्पक विमान को रामायण की कथा में एक दिव्य और अद्भुत वाहन के रूप में वर्णित किया गया है। रामानंद सागर की ‘रामायण’ में इसे सुनहरे पक्षी जैसी आकृति में प्रस्तुत किया गया था। इसके पिछले हिस्से में राजा के बैठने के लिए गद्दी जैसी व्यवस्था दिखाई गई थी, जो इसे शाही रूप देती थी।

वहीं, आधुनिक दौर की रामायण पर आधारित फिल्मों में पुष्पक विमान की कल्पना और प्रस्तुति अलग दिखाई देती है। नए दौर की फिल्मों में बेहतर तकनीक, विस्तृत डिजाइन और डिजिटल इफेक्ट्स के माध्यम से पौराणिक दृश्यों को अधिक भव्य बनाने की कोशिश की जा रही है।

सीमित संसाधनों में रचनात्मकता की मिसाल

रामानंद सागर की ‘रामायण’ में पुष्पक विमान का दृश्य उस दौर के टेलीविजन निर्माण की रचनात्मकता को दर्शाता है। तकनीकी सुविधाएं सीमित होने के बावजूद निर्माताओं ने उपलब्ध साधनों का इस्तेमाल कर पौराणिक कथा को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया।

यही वजह है कि दशकों बाद भी धारावाहिक के कई दृश्य दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं। पुष्पक विमान का फिल्मांकन इस बात का उदाहरण है कि किसी दृश्य को यादगार बनाने के लिए महंगी तकनीक के साथ-साथ कल्पनाशीलता और कुशल प्रस्तुति भी महत्वपूर्ण होती है।