रूस से रिश्तों पर जयशंकर का दोटूक जवाब, यूरोप को भी दिया स्पष्ट संदेश

0

डेस्क : रूस के साथ भारत के संबंधों और रूसी तेल की खरीद को लेकर पश्चिमी देशों की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत का रुख साफ शब्दों में सामने रखा है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों से जुड़े फैसले किसी बाहरी दबाव में नहीं, बल्कि अपने हितों और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर करता है।

जयशंकर ने भारत-रूस संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध केवल मौजूदा परिस्थितियों का परिणाम नहीं हैं। इनके पीछे दशकों का भरोसा, सहयोग और साझा अनुभव है। उन्होंने कहा कि रूस के साथ भारत के रिश्ते रक्षा क्षेत्र से आगे बढ़कर ऊर्जा, व्यापार, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक पहुंच चुके हैं।

रूसी तेल की खरीद को लेकर यूरोपीय देशों की आपत्तियों पर विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है। भारत दुनिया का एक बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है और देश की आवश्यकताओं को देखते हुए तेल की खरीद से जुड़े फैसले किए जाते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को यह तय करने का अधिकार है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को किस तरह पूरा करता है।

जयशंकर ने यूरोप के साथ भारत के संबंधों को लेकर भी सकारात्मक रुख जताया। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोप के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं। दोनों पक्षों के बीच व्यापार, तकनीक, रक्षा, अंतरिक्ष, सेमीकंडक्टर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत किया जा सकता है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में जयशंकर ने कहा कि भारत लगातार बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान का समर्थन करता रहा है। भारत ने दोनों पक्षों के साथ संपर्क बनाए रखा है और युद्ध से जुड़े मानवीय एवं आर्थिक मुद्दों पर भी अपनी भूमिका निभाई है।

विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत किसी एक खेमे की राजनीति में विश्वास नहीं करता। भारत की विदेश नीति का आधार अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के साथ-साथ विभिन्न देशों के साथ संतुलित और व्यावहारिक संबंध बनाए रखना है। रूस के साथ पारंपरिक संबंधों को कायम रखते हुए भारत यूरोप और अन्य वैश्विक शक्तियों के साथ भी अपने रिश्तों को लगातार मजबूत कर रहा है।