डेस्क : सैनिक स्कूलों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की भागीदारी बढ़ने के दावे को लेकर मंगलवार को रक्षा संबंधी स्थायी समिति की बैठक में तीखी बहस हुई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सैनिक स्कूलों के संचालन में आरएसएस की भागीदारी अनावश्यक रूप से बढ़ाई जा रही है। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कई मीडिया रिपोर्टों का हवाला दिया।
राहुल गांधी के दावे पर समिति के अध्यक्ष राधा कृष्ण सिंह ने उनसे संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा। अध्यक्ष ने कहा कि दावे से जुड़े दस्तावेज मिलने के बाद उन्हें संबंधित मंत्रालय को भेजकर जवाब मांगा जाएगा।
भाजपा सांसद ने भी उठाया सवाल
बैठक के दौरान भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के आरोप का आधार पूछा। उन्होंने जानना चाहा कि आखिर किन तथ्यों के आधार पर सैनिक स्कूलों में आरएसएस की बढ़ती भागीदारी का दावा किया जा रहा है।
बैठक के अंत में समिति के अध्यक्ष ने संबंधित अधिकारियों को मामले के तथ्यों की जांच करने को कहा। साथ ही सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल के तहत सैनिक स्कूलों का संचालन करने वाले संगठनों की सूची की भी जांच करने की बात कही गई।
करीब 70 सैनिक स्कूलों के आवंटन का दावा
सूत्रों के अनुसार, पीपीपी मॉडल के तहत करीब 70 सैनिक स्कूल अलग-अलग संगठनों को आवंटित किए गए हैं। इनमें विद्या भारती और सरस्वती शिशु मंदिर जैसे संगठन भी शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में केंद्र सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया या पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
रक्षा समिति की बैठक में उठे इस मुद्दे के बाद सैनिक स्कूलों के संचालन में निजी संगठनों की भूमिका और उनके चयन की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल समिति की ओर से संबंधित दावों और आवंटन की जानकारी की जांच की जाएगी।








