सात्त्विक मिठास: व्रत वाला दानेदार कलाकंद

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व्रत के दिनों में खान-पान भले ही सीमित हो जाता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि स्वाद के साथ समझौता किया जाए। व्रत की थाली में यदि कुछ मीठा और स्वादिष्ट हो, तो पूरे दिन की सादगी में भी एक अलग-सी मिठास घुल जाती है।

ऐसे ही पारंपरिक स्वाद का नाम है दानेदार कलाकंद। दूध और पनीर से तैयार होने वाली यह मिठाई न केवल बनाने में आसान है, बल्कि व्रत के अनुकूल सामग्री के कारण इसे सावन, नवरात्रि या अन्य उपवास के दिनों में भी बनाया जा सकता है। इसकी खासियत है इसका हल्का दानेदार स्वाद, जो हर निवाले में घर की बनी मिठाई का एहसास देता है।

सामग्री

  • 1 लीटर फुल क्रीम दूध
  • 250 ग्राम ताजा पनीर
  • 4 से 5 बड़े चम्मच चीनी
  • 1/2 चम्मच इलायची पाउडर
  • 8 से 10 बादाम, बारीक कटे हुए
  • 8 से 10 पिस्ते, बारीक कटे हुए
  • 1 चम्मच नींबू का रस
  • 1 चम्मच घी

व्रत के लिए सेंधा नमक का उपयोग किया जा सकता है, हालांकि इस रेसिपी में इसकी आवश्यकता नहीं है।

बनाने की विधि

सबसे पहले एक भारी तले वाली कड़ाही में दूध डालकर मध्यम आंच पर उबालें। दूध को बीच-बीच में चलाते रहें, ताकि वह तली में चिपके नहीं। जब दूध थोड़ा गाढ़ा होने लगे, तब इसमें नींबू का रस डालें और हल्के हाथ से चलाएं। इससे दूध हल्का-सा फटने लगेगा और कलाकंद में वही खास दानेदार बनावट आएगी।

अब इसमें अच्छी तरह मसलकर तैयार किया हुआ ताजा पनीर डालें। आंच धीमी कर दें और मिश्रण को लगातार चलाते हुए पकाएं। धीरे-धीरे दूध का अतिरिक्त पानी सूखने लगेगा और मिश्रण गाढ़ा होकर कलाकंद जैसा दिखाई देने लगेगा।

जब मिश्रण पर्याप्त गाढ़ा हो जाए, तब इसमें चीनी डालें। चीनी डालने के बाद मिश्रण फिर थोड़ा ढीला होगा, इसलिए इसे कुछ मिनट और पकाना जरूरी है। लगातार चलाते रहें, जब तक कि मिश्रण दोबारा गाढ़ा होकर कड़ाही छोड़ने न लगे।

अब इसमें इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला दें। अंत में एक चम्मच घी डालने से कलाकंद में हल्की चमक और स्वाद दोनों बढ़ जाते हैं।

एक थाली या ट्रे में हल्का घी लगाकर तैयार मिश्रण को समान रूप से फैला दें। ऊपर से कटे हुए बादाम और पिस्ते डालकर हल्के हाथ से दबा दें। इसे कमरे के तापमान पर ठंडा होने दें और फिर लगभग एक घंटे के लिए फ्रिज में रख दें।

ठंडा होने के बाद कलाकंद को मनचाहे आकार में चौकोर या डायमंड शेप में काट लें।

दानेदार बनाने का खास तरीका

कलाकंद का असली स्वाद उसकी दानेदार बनावट में छिपा है। इसके लिए पनीर को बिल्कुल महीन पेस्ट न बनाएं। उसे हल्के हाथ से मसलकर छोटे-छोटे दानों जैसा ही रखें। दूध को भी बहुत ज्यादा सुखाने के बजाय इतना पकाएं कि उसमें हल्की नमी बनी रहे। यही छोटी-सी सावधानी कलाकंद को बाजार की मिठाई जैसा नहीं, बल्कि घर की बनी पारंपरिक मिठाई जैसा स्वाद देती है।

व्रत की मिठास, घर के स्वाद के साथ

व्रत केवल भोजन की सीमाओं का नाम नहीं, बल्कि संयम और साधना का भी समय है। ऐसे में घर पर बनी यह सरल मिठाई व्रत की सादगी में स्वाद की एक सुंदर जगह बना सकती है।

दूध की पौष्टिकता, पनीर की नरमी और इलायची की खुशबू से तैयार दानेदार कलाकंद परिवार के साथ व्रत के दिन मिठास बांटने का एक सहज और स्वादिष्ट विकल्प है। खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए बहुत अधिक सामग्री या विशेष तैयारी की जरूरत नहीं पड़ती।

कभी-कभी त्योहार और व्रत की मिठास बड़ी दुकानों से खरीदी हुई मिठाइयों में नहीं, बल्कि अपनी रसोई में धीमी आंच पर पकते दूध और उसमें घुली घर की खुशबू में मिलती है।