सहारनपुर मस्जिद मामले में गरमाई सियासत, ओवैसी ने भाजपा पर साधा निशाना

0

जयपुर :  एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर रविवार को भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकारें संविधान में दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के प्रति “नफरत” रखती हैं। ओवैसी ने कहा कि देश में जयपुर और सहारनपुर सहित विभिन्न स्थानों पर मस्जिदों को ध्वस्त किया गया है।

जयपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ओवैसी ने कहा कि सहारनपुर में जिस मस्जिद को हटाया गया, उसके निर्माण के समय एक स्थानीय मुस्लिम परिवार ने मस्जिद और मंदिर दोनों के लिए जमीन दान की थी। उन्होंने दावा किया कि संबंधित मस्जिद पंजीकृत वक्फ संपत्ति है और उसे कानूनी संरक्षण प्राप्त है।

ओवैसी ने केंद्र सरकार द्वारा किए गए वक्फ कानून में संशोधन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लाया गया नया वक्फ कानून असंवैधानिक, त्रुटिपूर्ण और आपत्तिजनक है। उन्होंने संपत्ति पर लंबे समय से कब्जे के अधिकार से जुड़े ‘एडवर्स पजेशन’ के प्रावधान का हवाला देते हुए सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाया।

उन्होंने कहा कि यदि कोई ढांचा सरकारी जमीन पर बनाया गया हो और वह 30 वर्षों तक वहां मौजूद रहे, तो कुछ परिस्थितियों में लंबे कब्जे के आधार पर अधिकार का दावा किया जा सकता है। ओवैसी ने इसी संदर्भ में मस्जिद के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए।

अदालत के आदेश के बाद हुआ ध्वस्तीकरण

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को शनिवार तड़के अदालत के आदेश के बाद ध्वस्त किया गया। जिला जज की अदालत ने 4 सितंबर को मस्जिद समिति की अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के पहले के आदेश को बरकरार रखा था।

इससे पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने 17 जुलाई को मस्जिद के ढांचे को हटाने का आदेश दिया था। मामले में सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण और उसके दुरुपयोग को लेकर करीब 6.41 करोड़ रुपये के मुआवजे का आदेश भी दिया गया था।

सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह ने बताया कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अदालत के आदेश और कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील और रणनीतिक स्थानों पर पीएसी तथा आरएएफ के अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई थी। साथ ही अफवाहों को रोकने के लिए सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी जा रही थी।