नई दिल्ली: कांग्रेस ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर कारगिल युद्ध के बाद की गई समीक्षा की तर्ज पर व्यापक और व्यवस्थित समीक्षा कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि समय-समय पर सामने आ रहे महत्वपूर्ण खुलासे इस तरह की औपचारिक समीक्षा का विकल्प नहीं हो सकते।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बुधवार को कहा कि पूर्व प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल (सेवानिवृत्त) अनिल चौहान की ओर से ऑपरेशन सिंदूर को लेकर हाल में दिए गए बयानों ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। रमेश ने कहा कि अभियान से जुड़े तथ्यों, फैसलों और उससे मिले सबक का व्यवस्थित आकलन जरूरी है।
उन्होंने याद दिलाया कि कारगिल युद्ध समाप्त होने के कुछ ही दिनों बाद, 29 जुलाई 1999 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने के. सुब्रह्मण्यम की अध्यक्षता में कारगिल समीक्षा समिति का गठन किया था। समिति की रिपोर्ट 23 फरवरी 2000 को संसद में पेश की गई थी।
रमेश के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अलग-अलग समय पर इंटरव्यू और व्याख्यानों के माध्यम से सामने आ रहे खुलासों से अभियान से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा जरूर हो रही है, लेकिन इनसे एक व्यापक समीक्षा की आवश्यकता समाप्त नहीं होती।
कांग्रेस नेता ने कहा कि कारगिल की तरह एक संस्थागत समीक्षा के माध्यम से ही यह स्पष्ट रूप से सामने आ सकता है कि ऑपरेशन के दौरान क्या हुआ, कौन से निर्णय लिए गए, उनके पीछे क्या परिस्थितियां थीं और भविष्य के लिए उनसे क्या सबक लिए जा सकते हैं।
दरअसल, पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने मंगलवार को ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े कुछ परिचालन पहलुओं पर चर्चा की थी। उन्होंने कहा था कि भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान के किराना हिल्स को निशाना नहीं बनाया, जहां कथित तौर पर परमाणु प्रतिष्ठान मौजूद है। उन्होंने बताया था कि सरगोधा की दिशा में कई आत्मघाती ड्रोन भेजे गए थे और उनमें से एक अपनी उड़ान क्षमता खोने के बाद किसी पहाड़ी से टकराया हो सकता है।
कांग्रेस ने इन बयानों के संदर्भ में एक बार फिर मांग रखी है कि ऑपरेशन सिंदूर का व्यापक मूल्यांकन कराया जाए, ताकि अभियान से जुड़े तथ्यों और रणनीतिक फैसलों का समग्र अध्ययन हो सके।








