सनातन धर्म और हिंदुत्व को अलग बताकर दिग्विजय सिंह ने छेड़ी नई राजनीतिक बहस

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डेस्क : मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने हिंदुत्व और सनातन धर्म को लेकर बड़ा बयान देकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। इंदौर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि हिंदुत्व का सनातन धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कट्टरपंथी विचारधाराएं समाज में वैमनस्य और विभाजन को बढ़ावा दे रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने राम मंदिर निर्माण से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

हिंदुत्व और सनातन धर्म को लेकर क्या बोले दिग्विजय सिंह?

दिग्विजय सिंह ने कहा कि देश में वैचारिक ध्रुवीकरण बढ़ रहा है और इसका असर सामाजिक सद्भाव के साथ-साथ संवैधानिक संस्थाओं पर भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने हिंदुत्व की विचारधारा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सनातन धर्म को हिंदुत्व के साथ जोड़कर देखना उचित नहीं है।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि एक तरफ हिंदुत्व की राजनीति और दूसरी तरफ असदुद्दीन ओवैसी की राजनीति समाज में वैमनस्य बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव आयोग, न्यायपालिका और शिक्षा व्यवस्था जैसी संस्थाओं को निष्पक्ष एवं स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए।

राम मंदिर निर्माण और जमीन के सौदों पर उठाए सवाल

दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और राम जन्मभूमि ट्रस्ट के कामकाज को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने जमीन की खरीद, निर्माण कार्यों के ठेकों और चंदे के उपयोग में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की।

उन्होंने दावा किया कि एक जमीन को करीब दो करोड़ रुपये में खरीदने के बाद अगले ही दिन राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने उसे 18 करोड़ रुपये में खरीदा। इसके अलावा उन्होंने मंदिर निर्माण से जुड़े ठेकों में कथित कमीशनखोरी के आरोपों का भी जिक्र किया।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। संबंधित पक्षों का जवाब सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

राम जन्मभूमि ट्रस्ट में बदलाव का प्रस्ताव

कांग्रेस नेता ने राम जन्मभूमि ट्रस्ट की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे भंग करने और मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी रामालय ट्रस्ट को सौंपने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों के संचालन में पारदर्शिता होनी चाहिए तथा चंदे, चढ़ावे, जमीन की खरीद और निर्माण कार्यों के खर्च का हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

उन्होंने धार्मिक परंपराओं से जुड़े संतों और विभिन्न पीठों के प्रतिनिधियों को मंदिर प्रबंधन में शामिल करने की भी वकालत की।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

दिग्विजय सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। साथ ही उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की।

उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम अनुचित तरीके से न हटाया जाए।

बयान से बढ़ सकती है सियासी बहस

दिग्विजय सिंह के इस बयान से हिंदुत्व, सनातन धर्म, राम मंदिर और चुनाव आयोग जैसे मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। कांग्रेस नेता ने जहां धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता का मुद्दा उठाया, वहीं उनके हिंदुत्व संबंधी बयान पर भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।

कुल मिलाकर, इंदौर में दिग्विजय सिंह की टिप्पणी ने धार्मिक विचारधारा और राजनीति के संबंधों को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।