बिजनेस डेस्क : सोने की कीमतों में आई तेजी ने सरकारी स्वर्ण बॉन्ड में निवेश करने वालों को शानदार रिटर्न दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की एक किस्त ने करीब छह साल में 192 प्रतिशत का प्रतिफल दिया है। इस निवेश के तहत एक लाख रुपये लगाने वाले निवेशक की रकम बढ़कर लगभग 2.92 लाख रुपये हो गई है। यह गणना सोने के भाव में बढ़ोतरी के आधार पर है। इसके अतिरिक्त निवेशकों को बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज भी लाभ में शामिल हो सकता है।
छह साल में निवेश पर मिला शानदार लाभ
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2020-21 की सातवीं किस्त 20 अक्टूबर 2020 को जारी की गई थी। अब इस किस्त के निवेशकों को समय से पहले निकासी का अवसर मिल रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक ने इस बॉन्ड के लिए प्रति इकाई 14,614 रुपये का भुगतान मूल्य निर्धारित किया है। निर्धारित तारीख 20 अक्टूबर को अवकाश होने के कारण समय से पहले निकासी की तारीख 19 अक्टूबर 2026 रखी गई है।
इस बॉन्ड में निवेश करने वालों को सोने की कीमत में बढ़ोतरी का सीधा लाभ मिला है। मूल निवेश मूल्य की तुलना में वर्तमान भुगतान मूल्य काफी अधिक है, जिसके चलते निवेशकों को लगभग 192 प्रतिशत का प्रतिफल प्राप्त हुआ है।
कैसे काम करता है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड?
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड केंद्र सरकार की ओर से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किया जाने वाला निवेश साधन है। इसमें निवेशक भौतिक सोना खरीदने के बजाय सोने के मूल्य से जुड़ी प्रतिभूतियां खरीदते हैं। इनका मूल्य सोने की कीमत के अनुसार घटता-बढ़ता है।
इस योजना में निवेशकों को सोने की कीमत में बढ़ोतरी से लाभ मिलने के साथ-साथ निर्धारित दर से ब्याज भी मिलता है। सामान्यतः इस पर सालाना 2.5 प्रतिशत ब्याज दिया जाता है, जिसका भुगतान प्रत्येक छह महीने में किया जाता है।
समय से पहले निकासी का क्या है नियम?
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की सामान्य अवधि आठ वर्ष होती है। हालांकि, निवेशक जारी होने की तारीख से पांच वर्ष पूरे होने के बाद निर्धारित ब्याज भुगतान की तारीख पर समय से पहले निकासी का विकल्प चुन सकते हैं। इसके लिए संबंधित किस्त की निर्धारित तारीख और आवेदन की समय-सीमा का ध्यान रखना जरूरी है।
समय से पहले भुगतान की कीमत पिछले तीन कारोबारी दिनों में 999 शुद्धता वाले सोने के औसत बंद भाव के आधार पर तय की जाती है। यह गणना इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन द्वारा प्रकाशित भावों के आधार पर की जाती है।
निवेशकों के लिए क्या है सबक?
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के इस प्रदर्शन से पता चलता है कि लंबी अवधि में सोने की कीमतों में बढ़ोतरी निवेशकों को अच्छा प्रतिफल दे सकती है। हालांकि, हर किस्त का प्रतिफल उसके जारी मूल्य, निवेश की अवधि और निकासी के समय सोने की कीमत पर निर्भर करता है।
निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि सोने की कीमतों में गिरावट आने पर प्रतिफल कम हो सकता है। इसलिए केवल पिछले वर्षों के शानदार प्रदर्शन को देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। निकासी से पहले संबंधित बॉन्ड की किस्त, भुगतान मूल्य, आवेदन की समय-सीमा और लागू कर नियमों की जानकारी लेना जरूरी है।
अस्वीकरण: यह समाचार केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसे निवेश संबंधी सलाह न माना जाए। निवेश या निकासी का निर्णय लेने से पहले भारतीय रिजर्व बैंक की आधिकारिक जानकारी और लागू कर नियमों की जांच करें।









