नई दिल्ली : सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक की लंबी भूख हड़ताल के चलते उनकी स्वास्थ्य स्थिति गंभीर बताई जा रही है। डॉक्टरों ने चिंता जताई है कि अगर अनशन आगे भी जारी रहा तो उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है और शरीर के महत्वपूर्ण अंगों के कामकाज पर भी खतरा बढ़ सकता है।
वांगचुक अपनी मांगों को लेकर अनशन पर हैं। लंबे समय तक भोजन नहीं लेने के कारण उनके शरीर में कमजोरी बढ़ रही है और वजन में भी लगातार गिरावट दर्ज की गई है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्वास्थ्य जांच कर रही है और जरूरी मानकों पर नजर बनाए हुए है।
लंबे उपवास से शरीर पर बढ़ रहा दबाव
चिकित्सकों के अनुसार, लंबे समय तक भोजन न मिलने से शरीर में ऊर्जा की कमी होने लगती है। शुरुआत में शरीर जमा ऊर्जा का इस्तेमाल करता है, लेकिन समय बढ़ने पर मांसपेशियों पर असर पड़ने लगता है। इससे कमजोरी बढ़ सकती है और हृदय समेत अन्य महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं।
डॉक्टरों ने बताया कि वांगचुक के स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। उनके रक्तचाप, शुगर स्तर और अन्य स्वास्थ्य संकेतकों की नियमित जांच की जा रही है।
वजन में आई गिरावट
रिपोर्ट के अनुसार, लंबे अनशन के कारण सोनम वांगचुक का वजन काफी कम हुआ है। चिकित्सकों का कहना है कि लगातार वजन कम होना शरीर में पोषण की कमी और कमजोरी का संकेत हो सकता है।
अगला चरण बताया जा रहा चिंताजनक
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक अनशन जारी रहने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है। शरीर में ऊर्जा की कमी बढ़ने से कई तरह की चिकित्सकीय जटिलताएं सामने आ सकती हैं।
स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बावजूद सोनम वांगचुक ने अपनी मांगों को लेकर अनशन जारी रखने का फैसला किया है। उनके समर्थक भी लगातार उनके साथ खड़े हैं।
स्वास्थ्य निगरानी पर जोर
प्रशासन और चिकित्सकीय टीम की ओर से उनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक चिकित्सा व्यवस्था तैयार रखी गई है।
सोनम वांगचुक लंबे समय से पर्यावरण, शिक्षा और लद्दाख से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। उनके अनशन को लेकर देशभर में चर्चा जारी है।








