मनोरंजन डेस्क : दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार रजनीकांत की सफलता की कहानी जितनी प्रेरणादायक है, उतना ही संघर्षपूर्ण उनका शुरुआती सफर भी रहा है। कभी बस कंडक्टर के रूप में काम करने वाले रजनीकांत ने अपनी मेहनत और अभिनय के दम पर फिल्म जगत में अलग पहचान बनाई। हालांकि, सफलता के साथ मिली शोहरत और काम के बढ़ते दबाव ने एक समय उन्हें इस कदर प्रभावित किया कि वर्ष 1981 में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
एक साल में करते थे 10 से 15 फिल्में
रजनीकांत ने वर्ष 1975 में फिल्म ‘अपूर्व रागंगल’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। वह एक साल में 10 से 15 फिल्मों तक में काम कर रहे थे। लगातार काम, बढ़ती कमाई और प्रशंसकों की उम्मीदों के बीच उनके लिए इस नई जिंदगी के दबाव को संभालना मुश्किल हो गया।
320 रुपये की कमाई से लाखों तक का सफर
वर्ष 1988 में ‘इंडिया टुडे’ को दिए एक साक्षात्कार में रजनीकांत ने स्वीकार किया था कि वह स्टारडम का दबाव नहीं झेल पाए थे। उन्होंने बताया था कि कुछ वर्ष पहले तक वह बस कंडक्टर के रूप में 320 रुपये कमाते थे, लेकिन फिल्मी दुनिया में सफलता मिलने के बाद उन्हें एक फिल्म के लिए पांच लाख रुपये तक मिलने लगे थे। अचानक मिली दौलत, शोहरत और लगातार काम करने की व्यस्तता ने उन्हें मानसिक रूप से थका दिया था।
अस्पताल में भर्ती होने के बाद बदली जीवनशैली
इस मुश्किल दौर के बाद रजनीकांत ने अपने जीवन और काम करने के तरीके में बदलाव किए। उन्होंने फिल्मों की संख्या कम की और निजी जीवन को अधिक समय देना शुरू किया। वर्ष 1981 में उन्होंने लता रंगाचारी से विवाह किया। दोनों की पहली मुलाकात उस समय हुई थी, जब लता अपने कॉलेज की पत्रिका के लिए उनका साक्षात्कार लेने पहुंची थीं।
रजनीकांत की जिंदगी का यह दौर बताता है कि अपार लोकप्रियता और आर्थिक सफलता के बावजूद व्यक्ति को मानसिक शांति और संतुलित जीवन की जरूरत होती है। पर्दे पर अपने अनोखे अंदाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले रजनीकांत का यह अनुभव उनके प्रशंसकों के लिए उनके व्यक्तित्व का एक अलग पहलू सामने लाता है।








