सत्य का अनुभव स्वयं करें, तभी होगा आत्मसात : मुनि श्री तत्त्व रूचि जी


जयपुर : मानसरोवर स्थित चौपड़ा ऐंक्लेव के द ट्विन टॉवर में शुक्रवार को आयोजित धर्मसभा में मुनि श्री तत्त्व रूचि जी “तरुण” ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन, सत्य की खोज और मैत्रीभाव का संदेश देते हुए कहा कि मनुष्य को सत्य की खोज स्वयं करनी चाहिए। उन्होंने भगवान महावीर की वाणी का उल्लेख करते हुए कहा कि वास्तविक सत्य वही है, जिसका अनुभव व्यक्ति स्वयं करे।

मुनि श्री ने कहा कि दूसरे के द्वारा खोजे गए सत्य को विश्वास के आधार पर स्वीकार किया जा सकता है, किन्तु वह उधार का सत्य होता है। जब तक साधक स्वयं अनुभव की अवस्था तक नहीं पहुँचता, तब तक सत्य का वास्तविक आत्मसात नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि परम लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जीवनभर सत्य की निरंतर खोज आवश्यक है।

आर्ष वाणी “अप्पणा सच्चमेसेज्जा, मेत्तिं भूएसु कप्पए” का भावार्थ समझाते हुए मुनि श्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति स्वयं सत्य की खोज करे और समस्त प्राणियों के प्रति मैत्रीभाव रखे। उन्होंने कहा कि संसार में दुःख और मृत्यु शाश्वत सत्य हैं, इसलिए मानव जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य सत्य की अनुभूति होना चाहिए।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री संभव कुमार जी ने कहा कि आचार्य श्री भिक्षु स्वामी सत्य के महान अनुसंधानकर्ता थे। उन्होंने जिनवाणी के गहन अध्ययन के आधार पर अनेक नवीन सिद्धांतों का प्रतिपादन किया। दान-दया, धर्म-अधर्म, पुण्य-पाप, सम्यक्त्व-मिथ्यात्व, साध्य-साधन तथा निर्जरा जैसे जैन दर्शन के मूलभूत सिद्धांतों की उनकी आगमसम्मत व्याख्या आज भी धार्मिक जगत को नई दृष्टि प्रदान कर रही है।

कार्यक्रम के दौरान हिरावत परिवार की ओर से संतों का श्रद्धापूर्वक स्वागत किया गया। इस अवसर पर श्रीमती कोमल जी हिरावत ने अपनी श्रद्धा एवं भक्ति भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त की। धर्मसभा का शुभारंभ भगवान तीर्थंकर पद्मप्रभु की स्तुति से हुआ, जिसके पश्चात श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से प्रेक्षाध्यान एवं नवकार मंत्र जप में सहभागिता की।

अंत में मंगल पाठ के साथ धर्मसभा का समापन श्रद्धा, आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मचिंतन के वातावरण में संपन्न हुआ।

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