डेस्क : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन के माध्यम से भारत तेजी से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश की एयरोस्पेस क्षमताओं और तकनीकी आत्मविश्वास में लगातार मजबूती आ रही है। बेंगलुरु में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की ओर से भारतीय वायुसेना (आईएएफ) और पवन हंस लिमिटेड (पीएचएल) को स्वदेश में निर्मित विमान और हेलीकॉप्टर सौंपे जाने के कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही।
राजनाथ सिंह ने कार्यक्रम में तीन प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित ध्रुव-एनजी सिविल हेलीकॉप्टर को डीजीसीए से टाइप सर्टिफिकेशन मिलने के बाद सौंपा गया। इसके अलावा एलसीए एफओसी ट्रेनर की अंतिम खेप भारतीय वायुसेना को दी गई और एचटीटी-40 बेसिक ट्रेनर विमान की सीरीज प्रोडक्शन वाली पहली इकाई भी वायुसेना को सौंपी गई।
रक्षा मंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम महज औपचारिक हस्तांतरण समारोह नहीं है, बल्कि भारत की स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमता, तकनीकी आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने कहा कि करीब एक दशक पहले रक्षा क्षेत्र की कई परियोजनाएं धीमी गति से आगे बढ़ रही थीं और तकनीक तथा उत्पादों के लिए भारत को बड़े पैमाने पर विदेशी देशों पर निर्भर रहना पड़ता था। इसके बाद देश ने आत्मनिर्भरता को केंद्रीय मंत्र के रूप में अपनाते हुए स्वदेशी क्षमता विकसित करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि मजबूत एयरोस्पेस उद्योग का उद्देश्य केवल रक्षा जरूरतों को पूरा करना नहीं होना चाहिए। इसके लिए ऐसा एकीकृत और मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने की आवश्यकता है, जो नागरिक और सैन्य, दोनों क्षेत्रों की विमानन जरूरतों को पूरा कर सके।
राजनाथ सिंह ने एलसीए एफओसी ट्रेनर को भारत की स्वदेशी सैन्य एयरोस्पेस क्षमता और लड़ाकू विमान निर्माण से जुड़े पारिस्थितिकी तंत्र की परिपक्वता का प्रतीक बताया। वहीं, ध्रुव-एनजी को उन्होंने स्वदेशी नागरिक एयरोस्पेस क्षमता का उदाहरण बताया।
रक्षा मंत्री ने युवा वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, डिजाइनरों, परीक्षण पायलटों और तकनीशियनों से ऐसी तकनीक विकसित करने का आह्वान किया, जो वर्तमान में दुनिया में उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत को अगले दशक में वैश्विक एयरोस्पेस तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी स्थान हासिल करने के लिए नई क्षमताएं विकसित करनी होंगी।
उन्होंने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर तालमेल पर भी जोर दिया। राजनाथ सिंह ने कहा कि अब सार्वजनिक और निजी क्षेत्र को एक-दूसरे का प्रतिस्पर्धी मानने के बजाय पूरक के रूप में देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बदलते युद्धक स्वरूप को देखते हुए स्वदेशी तकनीक और उत्पादन क्षमता विकसित करना समय की आवश्यकता है। भविष्य में हवाई अभियान अधिक सूचना-आधारित और तकनीक संचालित होंगे।
एचएएल की भूमिका की सराहना करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि कंपनी ने स्वदेशी रूप से एचटीटी-40 का निर्माण किया है और सीरीज प्रोडक्शन की पहली इकाई भी भारतीय वायुसेना को सौंप दी गई है। उन्होंने कहा कि इससे इस क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि एचटीटी-40 की विशेषताओं के आधार पर इसके निर्यात की संभावनाएं भी मौजूद हैं।
कार्यक्रम के दौरान भारतीय वायुसेना को दो एलसीए एफओसी ट्रेनर विमान सौंपे गए, जिससे फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस अनुबंध के तहत ट्विन-सीटर विमानों की आपूर्ति पूरी हो गई। इसके अलावा पवन हंस लिमिटेड को चार ध्रुव-एनजी हेलीकॉप्टर दिए गए। वहीं, एचटीटी-40 बेसिक ट्रेनर विमान की आपूर्ति की शुरुआत हुई, जिसके तहत भारतीय वायुसेना को कुल 70 विमान दिए जाने हैं।








