ट्रंप को कनाडा का करारा जवाब, लगाएगा जवाबी टैरिफ

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डेस्क : अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव सोमवार को उस समय और गहरा गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर नए शुल्क लगाने की धमकी दी। इसके जवाब में कनाडा मंगलवार को अमेरिका के खिलाफ जवाबी शुल्क और अन्य कदमों की घोषणा करने की तैयारी में है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने साफ कहा कि उनका देश अमेरिका के दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।

ट्रंप ने सोमवार को कनाडा के वाहन, ऑटो पार्ट्स और स्टील पर 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने की चेतावनी दी। उन्होंने कनाडा पर अमेरिका के साथ अनुचित व्यापार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कनाडा को अमेरिकी शर्तों के अनुरूप चलना होगा, अन्यथा उसे मौजूदा शुल्क से भी गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

कनाडा के वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन सहित चार कैबिनेट मंत्री मंगलवार सुबह सरकार की ओर से जवाबी कार्रवाई की घोषणा करेंगे। प्रधानमंत्री कार्नी ने संकेत दिया है कि कनाडा इस बार अमेरिकी शुल्क का डॉलर-दर-डॉलर जवाब देने के बजाय अधिक लक्षित कदम उठा सकता है, ताकि कनाडाई श्रमिकों और उद्योगों को नुकसान से बचाया जा सके।

कार्नी ने कहा कि बातचीत की मेज पर कनाडा को अमेरिका की अधीनस्थ इकाई के रूप में पेश करने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी मांगों का उद्देश्य कनाडा के ऑटो, स्टील और एल्युमिनियम जैसे प्रमुख उद्योगों को कमजोर करना है।

यह विवाद शुक्रवार को उस समय तेज हुआ, जब कार्नी ने ट्रंप प्रशासन के साथ चल रही व्यापार वार्ता से पीछे हटने का फैसला किया। इसके बाद ट्रंप ने करीब 20 अरब डॉलर के कनाडाई सामान पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाने की धमकी दी थी।

ऑटो उद्योग बना विवाद का केंद्र

अमेरिका और कनाडा के बीच ऑटो उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला बेहद गहराई से जुड़ी हुई है। कनाडा के ओंटारियो प्रांत में वाहन निर्माण संयंत्रों और कल-पुर्जा उद्योगों का बड़ा नेटवर्क है, जिसका सीधा संबंध अमेरिका के मिशिगन और अन्य राज्यों की फैक्ट्रियों से है। उत्पादन प्रक्रिया के दौरान कई ऑटो पार्ट्स कई बार सीमा पार करते हैं।

फोर्ड, जनरल मोटर्स और स्टेलेंटिस जैसी कंपनियों के कनाडा में बड़े संयंत्र हैं। ऐसे में वाहनों और ऑटो पार्ट्स पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने से इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में नौकरियों और उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर ने दावा किया कि कनाडा में ऑटो उत्पादन की शुरुआत 1960 के दशक के ऑटो पैक्ट के कारण हुई थी। वहीं कार्नी ने अमेरिकी प्रस्तावों को कनाडाई औद्योगिक आधार के लिए गंभीर खतरा बताया।

ओंटारियो के मुख्यमंत्री ने भी दी कड़े जवाब की चेतावनी

ओंटारियो के मुख्यमंत्री डग फोर्ड ने भी ट्रंप के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि कनाडा अमेरिकी दबाव के आगे झुकने के बजाय आर्थिक नुकसान सहने के लिए तैयार है।

फोर्ड ने कहा कि यदि विवाद और बढ़ता है तो कनाडा के पास कई विकल्प मौजूद हैं। इनमें अमेरिका को बिजली और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति पर रोक या कीमतों में बदलाव जैसे कदम भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी दबाव का जवाब देने के लिए ‘सब कुछ मेज पर’ है।

ओंटारियो पहले भी बिजली को दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर चुका है। पिछले चरण के व्यापार विवाद के दौरान प्रांत ने मिशिगन, मिनेसोटा और न्यूयॉर्क को निर्यात होने वाली बिजली पर 25 प्रतिशत अधिभार लगाया था।

ट्रंप और फोर्ड के बीच जुबानी जंग

व्यापार विवाद के बीच ट्रंप और डग फोर्ड के बीच व्यक्तिगत बयानबाजी भी तेज हो गई। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर फोर्ड पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए उन्हें कम प्रभावशाली और कम बुद्धिमान बताया। उन्होंने एक बार फिर कार्नी को ‘गवर्नर कार्नी’ कहकर संबोधित किया।

फोर्ड ने ट्रंप की टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कि वह इस तरह के व्यक्तिगत हमलों से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कनाडा में इस समय अमेरिका के खिलाफ व्यापक राजनीतिक एकजुटता दिखाई दे रही है।

हालांकि कार्नी की लिबरल पार्टी और फोर्ड की प्रोग्रेसिव कंजरवेटिव पार्टी राजनीतिक रूप से अलग हैं, लेकिन दोनों नेताओं ने व्यापार विवाद में कनाडा के हितों की रक्षा के लिए कड़ा रुख अपनाया है।

कनाडा की संप्रभुता का मुद्दा भी उठा

कार्नी ने कहा कि बातचीत के दौरान अमेरिका की ओर से ऐसी शर्तें रखी गईं, जिनसे कनाडा की अन्य देशों के साथ स्वतंत्र रूप से व्यापार समझौते करने की क्षमता प्रभावित हो सकती थी। कनाडाई प्रधानमंत्री ने इसे देश की संप्रभुता से जुड़ा मुद्दा बताया और ऐसी शर्तों को स्वीकार करने से इनकार किया।

कार्नी ने यह भी कहा कि विवाद केवल व्यापार और शुल्क तक सीमित नहीं है, बल्कि भाषा और संस्कृति से जुड़े मुद्दे भी इसमें शामिल हैं। कनाडा में फ्रांसीसी भाषा और संस्कृति की सुरक्षा को जहां मौलिक अधिकार माना जाता है, वहीं अमेरिका की ओर से इन्हें व्यापार से जुड़ी बाधाओं के रूप में देखा जाता है।

अमेरिका और कनाडा दुनिया के सबसे बड़े और एक-दूसरे पर निर्भर व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं। दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं ऑटोमोबाइल, ऊर्जा, कृषि, विनिर्माण और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं के जरिए गहराई से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में लंबे समय तक चलने वाला व्यापार युद्ध दोनों देशों के उद्योगों, कारोबार और श्रमिकों के लिए महंगा साबित हो सकता है।