जयशंकर ने लावरोव से की व्यापक बातचीत, पुतिन को सौंपा पीएम मोदी का व्यक्तिगत संदेश

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डेस्क : विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ व्यापक बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय सहयोग, क्षेत्रीय संकटों, वैश्विक चुनौतियों और बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई। जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर इसकी जानकारी दी।

जयशंकर ने कहा कि लावरोव के साथ बातचीत में भारत-रूस संबंधों के विभिन्न पहलुओं के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। यह बातचीत जयशंकर की रूस की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान हुई।

इससे पहले जयशंकर ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से क्रेमलिन में मुलाकात की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्यक्तिगत संदेश उन्हें सौंपा। जयशंकर ने 27वीं भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की बैठक के दौरान हुई चर्चाओं से भी पुतिन को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु सहयोग और अन्य क्षेत्रों में प्रगति की समीक्षा की गई।

जयशंकर ने पुतिन को प्रधानमंत्री मोदी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मोदी आगामी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में उनसे मुलाकात की उम्मीद रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पुतिन का स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं। दोनों नेताओं के बीच आपसी सुविधा के अनुसार वार्षिक शिखर बैठक आयोजित करने की भी उम्मीद जताई गई।

पुतिन ने जयशंकर का स्वागत करते हुए भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने जयशंकर से प्रधानमंत्री मोदी को अपनी शुभकामनाएं पहुंचाने का अनुरोध किया और एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान उनसे मुलाकात की उम्मीद जताई।

रूसी राष्ट्रपति ने भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग के तहत हुई चर्चाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा, उर्वरक आपूर्ति, परमाणु ऊर्जा और उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग बैठक के प्रमुख विषयों में शामिल रहे।

इससे पहले जयशंकर ने रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव के साथ 27वीं भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की बैठक की सह-अध्यक्षता की। बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक, व्यापारिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

जयशंकर 23 से 24 अगस्त तक मंतुरोव के निमंत्रण पर रूस की आधिकारिक यात्रा पर थे। यात्रा के दौरान उनकी रूसी नेतृत्व के साथ बातचीत का मुख्य जोर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर समन्वय बढ़ाने पर रहा।