विश्व में अहिंसा और शांति के लिए जैन विद्या का विस्तार जरूरी : मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’

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जयपुर :  अणुविभा केन्द्र, मालवीय नगर में रविवार को जैन विद्या, अहिंसा और आध्यात्मिक चेतना के संदेश से ओतप्रोत जैन विद्या कार्यशाला का आयोजन किया गया। समण संस्कृति संकाय, जैन विश्व भारती, लाडनूं एवं श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, जयपुर के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में जैन दर्शन और आध्यात्मिक ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दिखाई दिया।

कार्यशाला में जैन विद्या विज्ञ, आगम मंथन, सम्यग्दर्शन और जानें जैन धर्म का इतिहास सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं में सफल रहे 150 से अधिक प्रतिभागियों को ट्रॉफी एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने कहा कि आज पूरा विश्व अशांति और तनाव से गुजर रहा है और ऐसे समय में शांति के लिए जैन दर्शन की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि जैन विद्या के व्यापक प्रचार-प्रसार से विश्व में अहिंसा और शांति की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

मुनिश्री ने अहिंसा, अपरिग्रह, अनेकांतवाद, आत्मकर्तृत्व, सम्यग्दर्शन, कर्मवाद, पुरुषार्थवाद और स्याद्वाद जैसे जैन सिद्धांतों की व्याख्या करते हुए कहा कि ये सिद्धांत केवल धार्मिक जीवन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन को संतुलित, शांतिपूर्ण और सार्थक बनाने की दिशा भी दिखाते हैं।

मुनिश्री संभव कुमार जी ने नमस्कार महामंत्र पर आधारित गीत का संगान किया और मंत्र की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मंत्र की सिद्धि श्रद्धा और आस्था से होती है। उन्होंने नमस्कार महामंत्र को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

कार्यक्रम में समण संस्कृति संकाय के विभागाध्यक्ष मालचंद जी बेगानी, सह-अध्यक्ष हनुमान मल जी लूंकड़, सम्यग्दर्शन कार्यशाला के संयोजक पुखराज जी डागा, मोटिवेशनल वक्ता राकेश जी खटेड, मंगला जी कुंडलिया, कौशल्या जी जैन, सुशीला जी गोलछा, तेरापंथ सभा अध्यक्ष शांतिलाल गोलछा, मंत्री राजकुमार बाफना, पूनम जी तलेसरा, संजीव जी छाजेड़ सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ तेरापंथ महिला मंडल, शहर की बहनों द्वारा मंगल स्वागत गीत के साथ हुआ। कार्यशाला की संयोजना गणपत जी भंडारी, रोनक जी बोकड़िया, कमलेश जी बरड़िया, गौरव जी बरमेचा, संदीप जी भंडारी, राहुल जी छाजेड़ आदि ने की। कार्यक्रम का संचालन रोनक जी बोकड़िया ने किया।

इस अवसर पर प्रेक्षा पुरस्कार 2025 से सम्मानित विजया जी छल्लाणी का तेरापंथ सभा सहित विभिन्न संस्थाओं द्वारा अभिनंदन किया गया। धर्मा जी बांठिया, संतोष जी बैद एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों का भी दुपट्टा धारण करवाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया।

कार्यशाला ने जैन दर्शन की उस मूल भावना को रेखांकित किया, जिसमें आत्मशुद्धि के साथ-साथ समाज और विश्व में अहिंसा, संयम, सह-अस्तित्व और शांति की स्थापना का संदेश निहित है।