यूएन में एर्दोगन का कश्मीर राग, भारत-पाक बातचीत पर दिया जोर

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डेस्क : तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से एक बार फिर कश्मीर मुद्दे का उल्लेख किया है। उन्होंने दक्षिण एशिया में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत को जरूरी बताते हुए विवादों के समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत संवाद की वकालत की।

एर्दोगन ने अपने संबोधन में कहा कि क्षेत्र में मौजूद विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से किया जाना चाहिए। उन्होंने कश्मीर समेत अन्य मुद्दों को संयुक्त राष्ट्र के प्रासंगिक प्रस्तावों और चार्टर के सिद्धांतों के अनुरूप सुलझाने की बात कही। उनके संबोधन के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मौजूद थे।

कश्मीर मुद्दे पर एर्दोगन पहले भी संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपनी राय रख चुके हैं। भारत ने अतीत में उनके ऐसे बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई है और स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। नई दिल्ली लगातार यह रुख दोहराता रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच लंबित मुद्दों का समाधान द्विपक्षीय बातचीत के जरिए होना चाहिए।

भारत किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र महासभा में एर्दोगन द्वारा कश्मीर का फिर से उल्लेख किए जाने को भारत-तुर्की संबंधों और भारत-पाकिस्तान मुद्दे के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।