डेस्क : बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने हाल के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के कारणों पर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं के निजी और पारिवारिक स्वार्थ के कारण पार्टी को नुकसान हुआ। मायावती ने साथ ही संगठन को नए सिरे से मजबूत करने और जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने पर जोर दिया।
मायावती ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि कुछ लोग अपने समाज के बीच सक्रिय भूमिका निभाने के बजाय निजी हितों को प्राथमिकता देते रहे। इसका सीधा असर चुनावों में बसपा के प्रदर्शन पर पड़ा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से पार्टी की विचारधारा के प्रति पूरी निष्ठा के साथ काम करने की अपील की।
सर्वसमाज को साथ लाने पर जोर
बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी की नीति ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की रही है। पार्टी किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि समाज के सभी वर्गों के हितों के लिए काम करती है।
उन्होंने ब्राह्मण समाज समेत सर्वसमाज से बसपा के साथ मजबूती से जुड़ने की अपील की। मायावती ने कहा कि पार्टी सामाजिक भाईचारे और संविधान के मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
युवाओं को संगठन में मिलेगी जिम्मेदारी
मायावती ने कहा कि बसपा अब संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। ईमानदार, निष्ठावान और सक्रिय कार्यकर्ताओं को आगे लाया जाएगा। युवाओं को संगठन की जिम्मेदारी देकर नई पीढ़ी को तैयार करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से अंबेडकरवादी और संविधानवादी विचारधारा को मजबूत करने के लिए लगातार काम करने को कहा।
ब्राह्मण समाज को दिया भरोसा
मायावती ने ब्राह्मण समाज को भरोसा दिलाया कि चुनाव में उनकी भागीदारी और प्रतिनिधित्व का ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार बनने पर वर्ष दो हजार सात की तरह ब्राह्मण समाज समेत सभी वर्गों को उचित सम्मान और भागीदारी दी जाएगी।
दो हजार सत्ताईस की तैयारी तेज
उत्तर प्रदेश में दो हजार सत्ताईस के विधानसभा चुनाव को देखते हुए मायावती का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बसपा पिछले कुछ चुनावों में लगातार कमजोर हुई है। ऐसे में पार्टी अब संगठन को मजबूत करने और विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच अपनी पकड़ दोबारा बनाने की कोशिश कर रही है।








