डेस्क : यूपीआई से रोजाना भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए बड़ी खबर है। लोकसभा ने गुरुवार को ऐसा विधेयक पारित किया है, जिसके कानून बनने के बाद सरकार बैंकों और अन्य भुगतान सेवा प्रदाताओं को यूपीआई समेत कुछ इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाने की अनुमति दे सकेगी। हालांकि, अभी यूपीआई पर कोई नया शुल्क लागू नहीं किया गया है।
बिना चर्चा के लोकसभा में पारित हुआ विधेयक
लोकसभा ने ‘कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक, २०२६’ को विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच बिना चर्चा के पारित कर दिया। विधेयक में भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, २००७ में बदलाव का प्रावधान है। इसके जरिए उस कानूनी रोक को हटाने का रास्ता बनाया गया है, जो बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को कुछ अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर व्यापारी छूट दर लगाने से रोकती थी।
क्या अभी यूपीआई करने पर पैसे देने होंगे?
नहीं। विधेयक पारित होने का मतलब यह नहीं है कि आज से हर यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगना शुरू हो गया है। फिलहाल यूपीआई भुगतान शुल्क-मुक्त है। नए प्रावधान के बाद सरकार के पास यह तय करने का अधिकार होगा कि किन डिजिटल भुगतान माध्यमों पर व्यापारी छूट दर लगाई जाए और उसकी व्यवस्था क्या हो।
व्यापारी छूट दर क्या होती है?
व्यापारी छूट दर वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान की सुविधा देने वाले बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता आम तौर पर व्यापारी से लेते हैं। यह व्यवस्था कार्ड से भुगतान में भी देखने को मिलती है। यूपीआई के मामले में अब तक इस तरह का शुल्क लागू नहीं था।
ग्राहकों की जेब पर क्या पड़ेगा असर?
मौजूदा व्यवस्था के मुताबिक व्यापारी छूट दर का भुगतान कारोबारी करते हैं, ग्राहक नहीं। इसलिए अगर भविष्य में यूपीआई पर यह शुल्क लागू किया जाता है तो इसका सीधा शुल्क ग्राहक से लिए जाने की बात नहीं है। हालांकि, कारोबारियों पर लागत बढ़ने की स्थिति में इसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों पर पड़ सकता है। व्यापारी अपनी बढ़ी हुई लागत को वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में शामिल कर सकते हैं।
सरकार के पास अब क्या विकल्प होंगे?
विधेयक कानून बनने के बाद सरकार को डिजिटल भुगतान के अलग-अलग माध्यमों के लिए अलग नीति बनाने की गुंजाइश मिलेगी। सरकार यह तय कर सकेगी कि किन भुगतान माध्यमों पर व्यापारी छूट दर लागू की जाए। फिलहाल यूपीआई और रुपे पर कोई नया शुल्क लागू नहीं किया गया है।
डिजिटल भुगतान के साथ आंकड़ा केंद्रों पर भी जोर
इस विधेयक का दायरा केवल डिजिटल भुगतान तक सीमित नहीं है। सरकार का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण, विदेशी निवेश, आंकड़ा केंद्र, डिजिटल भुगतान और पूंजी बाजार को बढ़ावा देना भी है। प्रस्तावों में विदेशी मेघ कंपनियों के लिए कुछ मंजूरी संबंधी शर्तों को आसान करने और आंकड़ा केंद्रों को पट्टे या किराये पर संचालित करने की अनुमति जैसे प्रावधान भी शामिल हैं। सरकार भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित आंकड़ा केंद्रों का प्रमुख केंद्र बनाने पर भी जोर दे रही है।









