6000 करोड़ के सट्टेबाजी मामले में बड़ा एक्शन, महादेव ऐप का प्रमोटर सौरभ चंद्राकर गिरफ्तार

0

डेस्क :  महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले में केंद्रीय जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। करीब 6,000 करोड़ रुपये के कथित अवैध सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले के प्रमुख आरोपी एवं ऐप प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाया गया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अन्य केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से उसका प्रत्यर्पण कराया। रविवार शाम CBI की विशेष टीम उसे लेकर भारत पहुंची।

सौरभ चंद्राकर को अब छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया जाएगा। CBI के अनुसार, उसे चिकित्सकीय परीक्षण के बाद ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर ले जाया जाएगा। सोमवार को अदालत में उसकी पेशी होने की संभावना है।

इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर हुई कार्रवाई

सौरभ चंद्राकर लंबे समय से भारतीय जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर था। हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को उसके ओमान में होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने ओमान के अधिकारियों के साथ संपर्क स्थापित किया।

सौरभ के खिलाफ जारी इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। इसके बाद CBI और ED ने उसके खिलाफ जुटाए गए सबूतों के साथ ओमान सरकार को औपचारिक प्रत्यर्पण प्रस्ताव भेजा। दोनों देशों की एजेंसियों के बीच समन्वय के बाद प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी हुई।

CBI के दो और ED के एक मामले में वांछित

सौरभ चंद्राकर CBI के दो मामलों में वांछित है। इन दोनों मामलों में एजेंसी पहले ही आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय के एक मामले में भी उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की जा चुकी है।

भारत पहुंचने के बाद अब जांच एजेंसियां उससे पूछताछ कर सकती हैं। माना जा रहा है कि उसकी गिरफ्तारी से महादेव बेटिंग नेटवर्क के संचालन, वित्तीय लेनदेन और इससे जुड़े अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।

रवि उप्पल के साथ मिलकर खड़ा किया था नेटवर्क

जांच एजेंसियों के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर ने रवि उप्पल के साथ मिलकर महादेव ऑनलाइन बुक बेटिंग नेटवर्क खड़ा किया था। इस नेटवर्क के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश और अन्य खेलों पर ऑनलाइन सट्टेबाजी कराई जाती थी।

जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क का संचालन फ्रेंचाइजी आधारित पैनल और शाखाओं के माध्यम से किया जाता था। देश के विभिन्न हिस्सों में फैले इन पैनलों के जरिए लोगों को ऑनलाइन सट्टेबाजी से जोड़ा जाता था।

म्यूल बैंक खातों और हवाला से होता था लेनदेन

CBI की जांच के अनुसार, कथित अवैध सट्टेबाजी से प्राप्त रकम को म्यूल बैंक खातों के जरिए कई स्तरों पर ट्रांसफर किया जाता था। इसके बाद हवाला नेटवर्क के माध्यम से रकम विदेश भेजी जाती थी। जांच एजेंसियां इस पूरे वित्तीय नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।

सौरभ चंद्राकर को भारत लाया जाना इस मामले की जांच में अहम घटनाक्रम है। अब अदालत में पेशी और आगे होने वाली पूछताछ पर सभी की नजरें रहेंगी।