8.7 करोड़ युवा न पढ़ रहे, न काम कर रहे; नीति आयोग ने बताई वजह

0

डेस्क : देश में बड़ी संख्या में युवा न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न रोजगार में हैं और न ही किसी तरह का कौशल प्रशिक्षण ले रहे हैं। नीति आयोग की नई रिपोर्ट ‘रीइमैजिनिंग स्किलिंग फॉर विकसित भारत@2047’ के अनुसार, वर्ष 2021 के आंकड़ों के आधार पर 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के करीब 8.7 करोड़ युवा शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण से बाहर हैं। यह संख्या संबंधित आबादी का करीब 11 प्रतिशत है।

88 प्रतिशत घरेलू कामकाज में जुटे

रिपोर्ट का एक अहम पहलू यह है कि इन युवाओं में करीब 88 प्रतिशत घरेलू जिम्मेदारियों में लगे हुए हैं। इससे साफ है कि समस्या केवल बेरोजगारी तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में युवा घरेलू जिम्मेदारियों के कारण भी शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार से बाहर हैं।

कौशल विकास के लिए नई व्यवस्था का प्रस्ताव

नीति आयोग ने देश की स्किलिंग व्यवस्था में व्यापक बदलाव का सुझाव दिया है। रिपोर्ट में शिक्षा से सीधे नौकरी तक पहुंचने वाले पारंपरिक मॉडल के बजाय जीवनभर कौशल विकास और शिक्षा, प्रशिक्षण तथा रोजगार के बीच लचीले रास्ते बनाने पर जोर दिया गया है।

आयोग ने स्किलिंग व्यवस्था के लिए पांच प्रमुख समूहों की पहचान की है। इनमें स्कूली विद्यार्थी, उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले युवा, औपचारिक एवं अनौपचारिक क्षेत्र के कामगार, शिक्षा-रोजगार-प्रशिक्षण से बाहर युवा और महिलाएं शामिल हैं। इन समूहों के जरिए करीब 60 करोड़ नागरिकों को नई स्किलिंग व्यवस्था के दायरे में लाने का प्रस्ताव है।

युवाओं के सामने कई बड़ी बाधाएं

रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक परेशानी, प्रशिक्षण के दौरान आय का नुकसान, पहले की शिक्षा पर हुआ खर्च और लचीले प्रशिक्षण विकल्पों की कमी युवाओं को कौशल विकास से दूर रखती है। महिलाओं के मामले में घरेलू जिम्मेदारियों के साथ सुरक्षा, आवागमन और देखभाल से जुड़ी चुनौतियां भी बड़ी बाधा हैं।

राज्यों की होगी अहम भूमिका

नीति आयोग ने राज्यों को नई स्किलिंग व्यवस्था में प्रमुख भूमिका देने की बात कही है। राज्यों को स्थानीय श्रम बाजार, जिलों की जरूरत और उपलब्ध बुनियादी ढांचे के अनुसार शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार व्यवस्था को आपस में जोड़ने का सुझाव दिया गया है। रिपोर्ट में प्रशिक्षण की संख्या के बजाय रोजगार, करियर में प्रगति और आजीविका जैसे परिणामों को सफलता का आधार बनाने पर जोर दिया गया है।