कांग्रेस के शासनकाल में किसी को मंत्री तो किसी को राज्यपाल बनाया गया, पीयूष गोयल ने उठाया मुद्दा

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नई दिल्ली :  केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता पीयूष गोयल ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर सवाल उठाते हुए पार्टी के पुराने कार्यकाल का हवाला दिया। मंगलवार को मीडिया से बातचीत में गोयल ने कहा कि कांग्रेस को चुनाव आयोग पर सवाल उठाने से पहले अपने शासनकाल में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों और चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियों के बाद हुई घटनाओं पर भी विचार करना चाहिए।

पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में संवैधानिक पदों पर रहे कुछ अधिकारियों को बाद में राजनीतिक जिम्मेदारियां दी गईं। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एमएस गिल का उदाहरण देते हुए कहा कि वे चुनाव आयोग में अपनी भूमिका के बाद संसद पहुंचे और केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी शामिल हुए। गोयल ने आरके त्रिवेदी का उल्लेख करते हुए कहा कि 1985 में मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में उनका कार्यकाल समाप्त होने के लगभग दो महीने बाद उन्हें गुजरात का राज्यपाल नियुक्त किया गया था।

नवीन चावला की नियुक्ति पर भी उठाए सवाल

भाजपा नेता ने वर्ष 2005 में नवीन चावला को चुनाव आयुक्त नियुक्त किए जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने उस समय की नियुक्ति प्रक्रिया और तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व की भूमिका पर सवाल किए। गोयल के मुताबिक, वर्ष 2009 में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने नवीन चावला को पद से हटाने की सिफारिश की थी। गोयल ने आरोप लगाया कि तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार ने इस सिफारिश पर कार्रवाई नहीं की।

राहुल गांधी के रवैये की आलोचना

पीयूष गोयल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हालिया बयानों और राजनीतिक रुख की आलोचना करते हुए उन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, लेकिन उसे अपने शासनकाल में लिए गए फैसलों का भी जवाब देना चाहिए।

गोयल ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने चुनाव आयोग को स्वतंत्र रूप से काम करने की स्वायत्तता दी है और चुनाव आयुक्तों को राजनीतिक लाभ देने का प्रयास नहीं किया है।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता और उसकी नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक बहस के बीच गोयल के इन बयानों ने इस मुद्दे पर विवाद को और चर्चा में ला दिया है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से इन विशिष्ट आरोपों पर प्रतिक्रिया को इस खबर के उपलब्ध स्रोत में शामिल नहीं किया गया है।