प्रयागराज : उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश के बाद प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
पंचायत चुनाव में देरी और मौजूदा ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए रखने के मुद्दे पर लंबे समय से विवाद चल रहा है। अदालत ने चुनाव समय पर कराने की संवैधानिक व्यवस्था पर जोर देते हुए निर्वाचन आयोग से निर्धारित समयसीमा में चुनाव संपन्न कराने को कहा है।
पांच साल का होता है पंचायतों का कार्यकाल
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243ई के अनुसार, पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। कार्यकाल समाप्त होने से पहले नए चुनाव कराना संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा है। इसी प्रावधान का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता ने पंचायत चुनाव में देरी पर सवाल उठाए थे।
उत्तर प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो गया था। इसके बाद राज्य सरकार ने मौजूदा ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने का आदेश जारी किया था। इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई।
ग्राम प्रधानों के प्रशासक बने रहने पर सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में बनाए रखने पर आपत्ति जताई थी। अदालत ने राज्य सरकार से चुनाव कराने की समयसीमा स्पष्ट करने को कहा था। याचिका में मांग की गई कि पंचायतों का संचालन नियमानुसार प्रशासकों के माध्यम से कराया जाए और जल्द चुनाव संपन्न हों।
चुनाव की समयसीमा पर निगाहें
हाईकोर्ट के तीन महीने के भीतर चुनाव कराने के निर्देश के बाद अब राज्य निर्वाचन आयोग की तैयारियां महत्वपूर्ण होंगी। मतदाता सूची, चुनाव कार्यक्रम और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं के आधार पर चुनाव की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
पंचायत चुनाव प्रदेश की ग्रामीण राजनीति और स्थानीय प्रशासन के लिए अहम हैं। ऐसे में अदालत के आदेश के बाद चुनाव प्रक्रिया और ग्राम प्रधानों के प्रशासक के रूप में बने रहने को लेकर आगे के घटनाक्रम पर सबकी नजर रहेगी।








