लाडनूं : जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अधिशास्ता परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी की पावन सन्निधि में आज मुनि रमणीय कुमार जी का देवलोकगमन हो गया। इस हेतु आज मुख्य प्रवचन कार्यक्रम भी स्थगित रहा।
मुनि रमणीय कुमार जी कई वर्षों से वर्षीतप की साधना कर रहे थे और इन दिनों सिद्धि तप चल रहा था। आज सिद्धि तप के सातवें दिन प्रातः लगभग 9:13 बजे उन्होंने पूर्ण समाधि भाव के साथ इस नश्वर देह का त्याग किया। देवलोकगमन के उपरांत पूज्य आचार्य प्रवर ने मंगलपाठ सुनाकर मुनिश्री की पार्थिव देह को तेरापंथ समाज को सुपुर्द किया।
प्रातः लगभग 11:30 बजे जैन विश्व भारती स्थित सुधर्मा सभा से मुनि श्री की अंतिम बैकुंठी यात्रा जयघोषों के साथ रवाना हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया।
संसार पक्ष में मुनि रमणीय कुमार जी मूलतः राजस्थान के छापर के निवासी थे। उनकी स्वयं की दीक्षा 28 नवंबर 2013 को बीदासर में आयोजित ऐतिहासिक वृहद् दीक्षा महोत्सव में पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी के करकमलों द्वारा संपन्न हुई थी।
ज्ञातव्य है कि पूरा परिवार ही धर्मसंघ में दीक्षित होकर साधनारत है। उनकी संसारपक्षीय सुपुत्री साध्वी प्रणवप्रभा जी पहले से ही धर्मसंघ में दीक्षित हैं, वहीं कुछ दिन पूर्व 20 सितंबर को लाडनूँ में आयोजित दीक्षा समारोह में उनकी संसारपक्षीय धर्मपत्नी ने साध्वी ओमप्रभा जी के रूप में संयम जीवन अंगीकार किया था। इस प्रकार पूरे परिवार का ही चारित्र पथ को स्वीकार कर दीक्षा ग्रहण करना अपने आप में विशिष्ट उल्लेखनीय है।









