डेस्क : उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच न्यूज18 यूपी मेगा सर्वे के आंकड़े सामने आए हैं, जिनमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA), समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन और बहुजन समाज पार्टी (BSP) को लेकर लोगों की राय दर्ज की गई है।
लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, पी-वैल्यू एनालिटिक्स के सहयोग से किए गए इस सर्वे में प्रदेश के सभी 75 जिलों के 30,925 लोगों की राय ली गई। सर्वे में 66.6 प्रतिशत लोगों ने NDA को समर्थन देने की बात कही, जबकि 26.4 प्रतिशत ने समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन और 5.4 प्रतिशत ने बहुजन समाज पार्टी के पक्ष में राय दी।
योगी आदित्यनाथ के कामकाज पर कितने लोग संतुष्ट?
सर्वे के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की मौजूदा सरकार के कामकाज से 77.1 प्रतिशत लोग संतुष्ट नजर आए, जबकि 13.5 प्रतिशत लोगों ने असंतुष्टि जताई। मुख्यमंत्री पद की पसंद के सवाल पर योगी आदित्यनाथ को 66.2 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला। वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव को 24.4 प्रतिशत लोगों ने मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी पसंद बताया।
कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचा भी अहम मुद्दे
सर्वे में सरकार के कामकाज का आकलन कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे, सरकारी योजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, भ्रष्टाचार और रोजगार जैसे मुद्दों पर किया गया। इनमें कानून-व्यवस्था के मामले में 74 प्रतिशत लोगों ने संतुष्टि जताई। वहीं, 68.6 प्रतिशत लोग बुनियादी ढांचे और 66.3 प्रतिशत लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से संतुष्ट बताए गए।
कानून-व्यवस्था को 33.4 प्रतिशत लोगों ने अपनी पहली प्राथमिकता बताया। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश के मतदाताओं की राय में सुरक्षा और प्रशासन से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
रोजगार के मुद्दे पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया
सर्वे में रोजगार सरकार के कामकाज का अपेक्षाकृत कमजोर पक्ष बनकर सामने आया। रोजगार के मामले में 58.3 प्रतिशत लोग संतुष्ट बताए गए, जबकि बेरोजगार लोगों के बीच यह आंकड़ा 50.7 प्रतिशत रहा। भाजपा-एनडीए समर्थकों में भी रोजगार को लेकर संतुष्टि का स्तर 74.5 प्रतिशत दर्ज किया गया।
2027 के चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के लिए अहम संकेत
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सामने आए ये आंकड़े राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माने जा सकते हैं। हालांकि, सर्वे में दर्ज राय को चुनाव परिणाम नहीं माना जा सकता। चुनाव में मतदाताओं का अंतिम रुख उम्मीदवारों, गठबंधनों, स्थानीय मुद्दों, चुनाव प्रचार और मतदान के समय की परिस्थितियों से प्रभावित हो सकता है।









