डेस्क : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना के वरिष्ठ कमांडरों से भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अगले 20 से 30 वर्षों के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टिकोण विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बदलते भू-राजनीतिक हालात और युद्ध के स्वरूप को देखते हुए सैन्य रणनीतियों में लचीलापन बनाए रखना आवश्यक है।
सेना कमांडरों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि सेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने के साथ-साथ तत्काल उभरने वाली सुरक्षा परिस्थितियों से निपटने के लिए भी सक्षम रहना होगा। उन्होंने बदलती परिस्थितियों के अनुरूप सैन्य क्षमताओं के विकास, नियमित समीक्षा और आवश्यक सुधारों पर जोर दिया।
आधुनिक तकनीक और संयुक्त सैन्य क्षमता पर जोर
राजनाथ सिंह ने आधुनिक युद्ध में ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्वायत्त प्रणालियों, डेटा विश्लेषण, साइबर सुरक्षा और सुरक्षित संचार नेटवर्क की बढ़ती भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने सेना में तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने और सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक युद्ध में विभिन्न क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। हवाई, समुद्री, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों के बावजूद भूमि पर सैन्य अभियानों और थल सेना की भूमिका राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन जारी
सम्मेलन के दौरान राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना की लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन (Land Warfare Doctrine) जारी की। यह दस्तावेज बदलते युद्ध के स्वरूप और भविष्य के संघर्षों की चुनौतियों का सामना करने के लिए सेना को तैयार करने की व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत करता है।
रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान ने नवीन सोच, बेहतर समन्वय और उन्नत हथियार प्रणालियों के महत्व को प्रदर्शित किया। उन्होंने सेना में जारी पुनर्गठन और आधुनिक तकनीक को अपनाने की पहलों की भी सराहना की।
आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन पर बल
राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को महत्वपूर्ण प्राथमिकता बताते हुए स्वदेशी रक्षा उत्पादन को आगे बढ़ाने और सुधारों को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सेना में मानव संसाधन प्रबंधन को बेहतर बनाने और सशस्त्र बलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी बल दिया।
तीन दिवसीय सेना कमांडर सम्मेलन 21 से 23 अक्टूबर तक नई दिल्ली में आयोजित हुआ। इसमें सेना के वरिष्ठ नेतृत्व ने बदलते सुरक्षा वातावरण, सैन्य तैयारियों, क्षमता विकास और भविष्य की चुनौतियों से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया।
सम्मेलन के दौरान रक्षा मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र जर्नल का अनावरण भी किया और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले भारतीय सेना के जवानों को सम्मानित किया।









