डेस्क : देश की तीन प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में शानदार मुनाफा दर्ज किया है। खास बात यह है कि पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की बिक्री पर नुकसान उठाने के बावजूद इन कंपनियों ने जुलाई से सितंबर 2026 के बीच कुल 30,106 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया है। पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले यह करीब 68.3 प्रतिशत अधिक है।
तीनों कंपनियों के नतीजों में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) सबसे आगे रही। कंपनी ने सितंबर तिमाही में 21,630 करोड़ रुपये का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि के 7,610 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 184 प्रतिशत अधिक है। यह IOC का अब तक का सबसे बड़ा तिमाही मुनाफा है।
वहीं, भारत पेट्रोलियम (BPCL) ने दूसरी तिमाही में 4,993 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया। हालांकि, पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले इसमें 22.5 प्रतिशत की गिरावट आई है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) का मुनाफा 3,483 करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर करीब 9 प्रतिशत कम है।
रिफाइनिंग मार्जिन बढ़ने से कंपनियों को हुआ फायदा
तेल कंपनियों के मुनाफे में इस बड़ी बढ़ोतरी की प्रमुख वजह रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार और इन्वेंट्री गेन रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण कंपनियों को कच्चा तेल कम कीमत पर मिला। इसके अलावा पेट्रोलियम उत्पादों के बेहतर मार्जिन ने भी कमाई बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
इंडियन ऑयल को इस दौरान करीब 7,000 करोड़ रुपये का इन्वेंट्री गेन हुआ। वहीं, HPCL का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) बढ़कर 32.15 डॉलर प्रति बैरल और BPCL का 32.53 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।
पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर कंपनियों को नुकसान
एक तरफ कंपनियां रिकॉर्ड मुनाफा कमा रही हैं, तो दूसरी तरफ पेट्रोल और डीजल की खुदरा बिक्री उनके लिए चुनौती बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने तक कंपनियों को पेट्रोल की बिक्री पर प्रति लीटर 4 से 5 रुपये और डीजल पर 18 से 20 रुपये तक का नुकसान हो रहा था।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें लंबे समय से स्थिर हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। ऐसे में कंपनियों को लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर खुद वहन करना पड़ रहा है।
LPG सिलेंडर पर नुकसान बढ़ने की आशंका
घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर भी तेल कंपनियों का नुकसान बढ़ रहा है। IOC के निदेशक (वित्त) अनुज जैन के मुताबिक, सितंबर में एक एलपीजी सिलेंडर पर नुकसान 184 रुपये था, जो अक्टूबर में बढ़कर 229 रुपये हो गया।
कंपनी के अनुमान के अनुसार, नवंबर में यह नुकसान 309 रुपये और दिसंबर में 370 रुपये प्रति सिलेंडर तक पहुंच सकता है। इससे तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ने की आशंका है।
तीनों कंपनियों का बकाया नुकसान 67,900 करोड़ रुपये
सितंबर के अंत तक IOC, BPCL और HPCL की कुल अंडर-रिकवरी यानी लागत और बिक्री मूल्य के बीच का बकाया नुकसान करीब 67,900 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था।
इसमें इंडियन ऑयल का हिस्सा 32,505.69 करोड़ रुपये, BPCL का 17,334.40 करोड़ रुपये और HPCL का 18,048.82 करोड़ रुपये है।
आगे मुनाफे पर पड़ सकता है असर
सितंबर तिमाही में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन से कंपनियों को बड़ा फायदा मिला, लेकिन अक्टूबर में कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिली है।
ऐसे में आने वाली तिमाहियों में कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है, तो कंपनियों को इन्वेंट्री लॉस भी उठाना पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, सरकारी तेल कंपनियों के ताजा नतीजे बताते हैं कि रिफाइनिंग कारोबार से मजबूत कमाई के बावजूद पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की बिक्री से जुड़ा नुकसान उनके लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।








