डेस्क : रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की सराहना करते हुए कहा है कि भारत ऐसा देश है जिसने कभी किसी विदेशी दबाव या निर्देश के आगे झुकना स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों और संप्रभु निर्णयों के आधार पर नीतियां बनाता है और यही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है।
सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच (एसपीआईईएफ) के दौरान पुतिन ने कहा कि भारत और चीन जैसे बड़े राष्ट्र स्वतंत्र रूप से अपने निर्णय लेने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि इन देशों पर बाहरी दबाव डालकर उनकी नीतियों को प्रभावित नहीं किया जा सकता। भारत ने हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और किसी भी विदेशी शक्ति के निर्देशों का अनुसरण नहीं किया है।
रूसी राष्ट्रपति की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत और रूस के संबंधों को लेकर पश्चिमी देशों की ओर से समय-समय पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। पुतिन ने संकेत दिया कि भारत-रूस संबंधों को कमजोर करने के प्रयास सफल नहीं होंगे क्योंकि दोनों देशों के रिश्ते आपसी विश्वास और दीर्घकालिक सहयोग पर आधारित हैं।
उन्होंने कहा कि रूस भारत को एक विश्वसनीय और महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखता है। ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। पुतिन ने भारत की आर्थिक प्रगति और तकनीकी उपलब्धियों की भी सराहना की।
अपने संबोधन में पुतिन ने यह भी कहा कि रूस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की कोशिशें सफल नहीं हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रतिबंधों के बावजूद रूस के दुनिया के अनेक देशों के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंध मजबूत बने हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है और भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता की नीति पर कायम रहते हुए विभिन्न देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए हुए है।


