आचार्य भिक्षु का दर्शन युग को नई दिशा देने वाला : मुनिश्री तत्त्व रुचि

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जयपुर :  अणुविभा केन्द्र, मालवीय नगर में रविवार को तेरापंथ युवक परिषद की ओर से ‘भिक्षु दर्शन कार्यशाला’ का आयोजन किया गया। कार्यशाला में समाज के युवाओं एवं किशोरों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य आचार्य भिक्षु के दर्शन, चिंतन और सिद्धांतों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाना रहा।

कार्यक्रम को सान्निध्य प्रदान करते हुए मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने कहा कि आचार्य भिक्षु का दर्शन युग को नई दृष्टि देने वाला और नई सृष्टि का निर्माण करने वाला दर्शन है। उन्होंने कहा कि भिक्षु केवल एक व्यक्ति का नाम नहीं, बल्कि एक विचार है, जो धर्म और समाज की सत्ता को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है।

मुनिश्री ने कहा कि आचार्य भिक्षु ने लौकिक और लोकोत्तर जीवन की दिशाओं को अलग-अलग समझाया। दोनों की अपनी मूल्यवत्ता है, लेकिन दोनों को मिला देने से उनकी मौलिकता प्रभावित होती है। लौकिकता संसार में जीने का मार्ग है, जबकि लोकोत्तर मार्ग संसार से पार जाने की साधना का मार्ग है।

मुनिश्री संभव कुमार जी ने कहा कि भगवान महावीर की वाणी को हजारों-लाखों लोगों ने पढ़ा और सुना, लेकिन उस सत्य के जिस गूढ़ मर्म को आचार्य भिक्षु ने जाना और समझा, उसे उन्होंने अपनी सूक्ष्म मेधा से समाज के सामने रखा। उनका चिंतन उस समय नया, अद्भुत और अद्वितीय था। उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी उन विचारों के पक्षधर थे, जिनमें आचार्य भिक्षु की विचारधारा की झलक दिखाई देती है।

कार्यशाला के मुख्य वक्ता श्री श्रेयांस कुमार कोठारी ने प्रश्नोत्तर के माध्यम से प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्होंने आचार्य भिक्षु के सिद्धांतों को सहज एवं रोचक तरीके से प्रस्तुत करते हुए युवाओं को उनके दर्शन से जुड़ने का संदेश दिया।

कार्यक्रम में तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष श्री प्रवीण कुमार जैन ने स्वागत भाषण दिया। श्री विजय जी बेंगाणी ने आभार ज्ञापित किया, जबकि श्री राहुल जी छाजेड़ ने कार्यक्रम का कुशल संचालन किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।

संथारा साधिका मंजुला जी गुजरानी का समाधिपूर्वक संथारा सम्पन्न

जयपुर प्रवासी एवं सरदारशहर निवासी स्वर्गीय श्री बजरंगलाल जी की धर्मपत्नी तथा श्री मनोज कुमार गुजरानी जी की माताजी संथारा साधिका श्रीमती मंजुला जी गुजरानी का संथारा रविवार प्रातः 11:07 बजे समाधिपूर्वक सम्पन्न हुआ।

ज्ञातव्य है कि मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने एक दिन पूर्व शनिवार को उन्हें चौविहार संथारे का प्रत्याख्यान करवाया था। अल्प अवधि में ही संथारा साधिका ने आत्म-साधना के इस पावन संकल्प को पूर्णता प्रदान की।

उनकी इस आध्यात्मिक साधना को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं ने उनके उत्तरोत्तर आत्मिक विकास एवं शुभ आध्यात्मिक यात्रा की मंगलकामना की।