नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की नई तीन-भाषा नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि फिलहाल इस मामले में किसी प्रकार का अंतरिम आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि अदालत ने केंद्र सरकार, सीबीएसई और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है।
मामला सीबीएसई द्वारा कक्षा नौ से लागू की जा रही नई भाषा व्यवस्था से संबंधित है। इस नीति के तहत विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया गया है, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होंगी। नीति को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप लागू किया जा रहा है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि भाषा का चयन विद्यार्थियों और अभिभावकों की स्वतंत्र पसंद का विषय है तथा किसी विशेष ढांचे को अनिवार्य बनाना शिक्षा के अधिकार और व्यक्तिगत विकल्पों को प्रभावित कर सकता है। याचिका में यह भी कहा गया कि कई स्कूलों में आवश्यक भाषा शिक्षकों और संसाधनों की उपलब्धता अभी पर्याप्त नहीं है, जिससे विद्यार्थियों और शिक्षण संस्थानों के सामने व्यावहारिक कठिनाइयां उत्पन्न हो सकती हैं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने यह आशंका भी जताई कि नीति के त्वरित क्रियान्वयन से लाखों विद्यार्थियों पर अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव पड़ सकता है। उनका कहना था कि नई व्यवस्था लागू करने से पहले व्यापक तैयारी और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
वहीं, अदालत ने अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि मामले के सभी पहलुओं पर विस्तृत सुनवाई की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाओं से पूछा है कि नई नीति को लागू करने के लिए क्या तैयारियां की गई हैं और इस संबंध में विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने को कहा है।
अब मामले की अगली सुनवाई में केंद्र सरकार, सीबीएसई और एनसीईआरटी के जवाबों पर विचार किया जाएगा। तब अदालत यह तय करेगी कि तीन-भाषा नीति से जुड़े संवैधानिक और प्रशासनिक प्रश्नों पर आगे किस प्रकार सुनवाई की जानी है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम रोक लगाने से इनकार के बाद सीबीएसई के लिए निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार नीति लागू करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।


