पलक की कस्टडी के बदले 93 लाख का फ्लैट? राजा चौधरी ने दी सफाई, बोले- ‘तंग आ गया था’

0

डेस्क : टीवी अभिनेत्री श्वेता तिवारी और उनके पूर्व पति राजा चौधरी के बीच वर्षों पुराने तलाक का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। राजा चौधरी ने अब उस विवादित समझौते पर अपनी चुप्पी तोड़ी है, जिसमें श्वेता तिवारी ने कथित तौर पर अपनी बेटी पलक तिवारी की कस्टडी के बदले करीब 93 लाख रुपये कीमत का एक फ्लैट राजा के नाम किया था। राजा ने इस पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उस समय वह कई परेशानियों से जूझ रहे थे और उन्हें रहने के लिए एक ठिकाने की जरूरत थी।

श्वेता तिवारी ने कुछ वर्ष पहले एक इंटरव्यू में दावा किया था कि तलाक के दौरान उनकी कानूनी टीम ने राजा के सामने उनके और बेटी पलक के नाम पर संयुक्त रूप से एक संपत्ति रखने का प्रस्ताव दिया था। राजा ने कथित तौर पर इसे स्वीकार नहीं किया और अकेले मालिकाना हक की मांग की। इसके बाद तलाक के समझौते में करीब 93 लाख रुपये कीमत का एक बेडरूम वाला फ्लैट राजा के नाम किया गया। इसके बदले राजा ने तलाक के कागजात पर हस्ताक्षर किए और पलक की कस्टडी की मांग नहीं करने पर सहमति जताई थी।

‘मैं तंग आ गया था’

अब सिद्धार्थ कन्नन को दिए इंटरव्यू में राजा चौधरी ने इस घटनाक्रम को अपनी नजर से बताया। उन्होंने दावा किया कि 2007 में अलग होने के बाद 2012 तक उनका मामला फैमिली कोर्ट में चलता रहा। राजा के मुताबिक, वह अदालत की लगभग हर तारीख पर पहुंचे, जबकि श्वेता के अदालत में आने को लेकर उन्होंने सवाल उठाए।

राजा ने यह भी दावा किया कि अदालत ने उन्हें बेटी पलक से एक तय जगह पर मिलने की अनुमति दी थी, लेकिन उनके अनुसार श्वेता पलक को वहां उनसे मिलाने नहीं लेकर गईं।

राजा ने कहा कि उस समय वह कई अन्य मामलों में भी फंसे हुए थे और एक समय ऐसा आया जब वह बेहद परेशान हो गए थे। उनके मुताबिक, उन्हें किराए पर भी घर नहीं मिल रहा था। ऐसे में उन्होंने फ्लैट को लेकर समझौता स्वीकार किया।

‘फ्लैट पहले 9 लाख में खरीदा गया था’

राजा चौधरी ने दावा किया कि जिस एक बेडरूम वाले फ्लैट की बात हो रही है, उसे उनके पिता ने श्वेता के साथ उनकी शादी के समय खरीदा था। उनके मुताबिक, उस समय फ्लैट की कीमत करीब 9 लाख रुपये थी और डाउन पेमेंट उनके पिता ने किया था, जबकि बाद में इसकी ईएमआई उन्होंने और श्वेता ने मिलकर चुकाई।

राजा ने कहा कि उन्होंने उस समय फ्लैट लेने का फैसला इसलिए किया क्योंकि उन्हें अपने रहने के लिए एक स्थायी जगह चाहिए थी। उन्होंने श्वेता के उन पुराने दावों पर भी सवाल उठाया, जिनमें इसे बेटी की कस्टडी के बदले किए गए त्याग के तौर पर पेश किया गया था।

राजा ने कहा कि बाद में उनके अनुसार समझौते की कहानी को उनके खिलाफ अलग तरीके से पेश किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी व्यक्ति का अपने रहने के लिए घर मांगना किस तरह बच्चे की कस्टडी और संपत्ति के बीच चुनाव से जोड़ा जा सकता है।

श्वेता तिवारी और राजा चौधरी की शादी वर्ष 1998 में हुई थी। दोनों की बेटी पलक तिवारी हैं। दोनों वर्ष 2007 में अलग हुए थे और वर्ष 2012 में उनका तलाक हुआ।