डेस्क : फिल्मकार करण जौहर ने अपनी चर्चित फिल्म ‘कभी अलविदा ना कहना’ को लेकर कई अनसुनी बातें साझा की हैं। उन्होंने बताया कि फिल्म के निर्देशन से पहले उनके पिता और निर्माता यश जौहर का निधन हो गया था। करण के मुताबिक, अगर उनके पिता जीवित होते तो शायद उन्हें इस विषय पर फिल्म बनाने की अनुमति नहीं देते।
करण ने कहा कि उनके पिता उनके लिए नैतिक दिशा दिखाने वाले व्यक्ति थे और काफी पारंपरिक सोच रखते थे। ऐसे में विवाहेतर संबंध जैसे संवेदनशील विषय पर फिल्म बनाना उनके लिए आसान नहीं होता। पिता के निधन के बाद करण ने महसूस किया कि अब उन्हें अपने फैसले खुद लेने हैं और उन्होंने अपनी रचनात्मक सीमाओं को पीछे छोड़कर फिल्म बनाई।
शाहरुख के किरदार को लेकर भी थी चिंता
करण ने बताया कि फिल्म में शाहरुख खान को ऐसे किरदार में दिखाना भी चुनौतीपूर्ण था, जो अपनी शादी के बाहर रिश्ते में पड़ता है। शाहरुख की पर्दे पर आदर्श पति और प्रेमी की छवि रही है। करण के अनुसार, शाहरुख भी इस बात को लेकर चिंतित थे कि दर्शक उनके किरदार को किस तरह स्वीकार करेंगे।
वर्ष 2006 में रिलीज हुई ‘कभी अलविदा ना कहना’ में शाहरुख खान, रानी मुखर्जी, अभिषेक बच्चन और प्रीति जिंटा मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म के विषय को लेकर उस समय भी काफी चर्चा और आलोचना हुई थी। करण ने बताया कि आज भी उन्हें लगता है कि इस तरह के विषय को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रिया काफी तीखी हो सकती है।








