भारत-चीन पर 100% तक टैरिफ का रास्ता साफ, रूस से तेल खरीदने वालों पर अमेरिका सख्त

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वॉशिंगटन: अमेरिकी सीनेट ने रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को भारी बहुमत से पारित कर दिया है। दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखे गए इस विधेयक में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। इनमें भारत और चीन भी शामिल हैं।

सीनेट में विधेयक के पक्ष में 86 और विरोध में 11 वोट पड़े। अब इसे कानून बनने के लिए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की मंजूरी जरूरी होगी। इसके बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने पर यह प्रभावी हो सकेगा।

रूस के शीर्ष अधिकारियों और कंपनियों पर भी प्रतिबंध का प्रावधान

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित कानून के तहत रूस सरकार के शीर्ष अधिकारियों पर अनिवार्य प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी शामिल हैं। इसके अलावा रूस के रक्षा औद्योगिक आधार को सहयोग देने वाली विदेशी कंपनियों पर भी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।

हालांकि, विधेयक में उन देशों के लिए छूट का प्रावधान भी है, जो रूस के कुल प्राकृतिक गैस निर्यात का 15 प्रतिशत से कम आयात करते हैं।

भारत-रूस तेल व्यापार पर पड़ सकता है असर

अमेरिका का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य रूस की सैन्य गतिविधियों को आर्थिक समर्थन देने वाली पेट्रोलियम आय को सीमित करना है। इसी क्रम में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान को रूस से ऊर्जा खरीदने वाले प्रमुख देशों के तौर पर चिन्हित किया गया है।

विधेयक को लेकर भारत पर संभावित असर के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति के आर्थिक सलाहकार परिषद के निदेशक केविन हैसेट ने कहा कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों को निशाना बनाने वाले नए प्रतिबंधों का भारत के साथ व्यापार वार्ता पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह बातचीत कर रही टीमों को तय करना है। एएनआई के सवाल पर हैसेट ने इस संबंध में विस्तार से टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि यह फैसला वार्ताकारों के स्तर पर होगा।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बीच बढ़ी चुनौती

रूस पर प्रस्तावित प्रतिबंध ऐसे समय में सामने आए हैं, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। टैरिफ का मुद्दा दोनों देशों के बीच वार्ता में प्रमुख विषय बना हुआ है।

फरवरी 2026 में दोनों देशों ने एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पेश की थी, जिसमें भारतीय निर्यात पर पारस्परिक टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने का प्रस्ताव था। इसके बदले भारत की ओर से अमेरिकी ऊर्जा संसाधनों और तकनीक की खरीद बढ़ाने की बात सामने आई थी।

हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) के तहत पारस्परिक टैरिफ व्यवस्था को अमान्य किए जाने के बाद इस व्यवस्था के क्रियान्वयन में बाधा आई। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने अस्थायी तौर पर धारा 122 के तहत नई व्यवस्था अपनाई।

वर्तमान में जबरन श्रम से जुड़े प्रावधानों के तहत लागू धारा 301 की व्यवस्था में अधिकांश भारतीय वस्तुओं पर सामान्य एमएफएन दरों के अतिरिक्त 10 प्रतिशत का पूरक शुल्क लगाया जा रहा है।

इन बदलती व्यापारिक व्यवस्थाओं के बीच भारत और अमेरिका के बीच बातचीत जारी है। दोनों देश एक ऐसे अंतरिम व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे टैरिफ का दबाव कम हो, बाजार तक पहुंच बढ़े और आर्थिक संबंधों को और मजबूत किया जा सके।

हैसेट पहले भी भारत-अमेरिका संबंधों को “जटिल” बता चुके हैं, हालांकि उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर उम्मीद जताई है।