डेस्क : शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के लिए अहम खबर है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के नए नॉमिनेशन नियम 1 सितंबर 2026 से लागू होने जा रहे हैं। इसके तहत एकल धारक वाले डीमैट खाते और म्यूचुअल फंड फोलियो में नॉमिनी का नाम देना जरूरी होगा। हालांकि, यदि निवेशक नॉमिनी नहीं रखना चाहता है तो वह निर्धारित घोषणा-पत्र के जरिए इससे बाहर निकलने का विकल्प चुन सकता है।
सेबी ने नॉमिनेशन की प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ निवेशकों के लिए विकल्प भी स्पष्ट किए हैं। नियामक का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य निवेशक की मृत्यु के बाद शेयर और म्यूचुअल फंड इकाइयों के हस्तांतरण को आसान बनाना तथा उत्तराधिकार से जुड़े विवादों और देरी को कम करना है।
संयुक्त खातों में नॉमिनी की बाध्यता नहीं
नया नियम एकल धारक वाले डीमैट खाते और म्यूचुअल फंड फोलियो पर लागू होगा। संयुक्त रूप से संचालित डीमैट खातों और म्यूचुअल फंड फोलियो में नॉमिनी बनाना अभी भी वैकल्पिक रहेगा।
हालांकि, संयुक्त खाते में नॉमिनी जोड़ने, बदलने या हटाने के लिए सभी संयुक्त खाताधारकों की सहमति जरूरी होगी।
अधिकतम तीन नॉमिनी ही रख सकेंगे
सेबी ने पहले एक खाते में नॉमिनी की अधिकतम संख्या तीन से बढ़ाकर 10 करने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन इसे वापस ले लिया गया है। नए नियमों के तहत निवेशक अधिकतम तीन नॉमिनी रख सकेंगे।
यदि निवेशक ने नॉमिनी के बीच हिस्सेदारी का प्रतिशत तय नहीं किया है तो निवेश की संपत्ति तीनों के बीच बराबर बांटी जाएगी।
नॉमिनी नहीं रखना तो वीडियो देने की जरूरत नहीं
नॉमिनी नहीं रखने वाले निवेशकों के लिए प्रक्रिया अब आसान कर दी गई है। पहले कुछ परिस्थितियों में नॉमिनेशन से बाहर रहने के लिए वीडियो सत्यापन की व्यवस्था थी। अब इसे खत्म किया जा रहा है।
निवेशक ऑनलाइन या ऑफलाइन निर्धारित घोषणा-पत्र देकर नॉमिनी नहीं रखने का विकल्प चुन सकेंगे।
सिर्फ नाम और संबंध की जानकारी जरूरी
नॉमिनी से जुड़ी जानकारी देने की प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है। अब नॉमिनी का नाम और निवेशक के साथ संबंध बताना अनिवार्य होगा। पता, ईमेल, मोबाइल नंबर और पहचान संबंधी अन्य जानकारी जैसी कई जानकारियां वैकल्पिक रहेंगी।
नॉमिनी को खाता चलाने का अधिकार नहीं
सेबी ने नॉमिनी से जुड़े एक अन्य प्रस्ताव को भी फिलहाल लागू नहीं किया है। इसके तहत यह प्रस्ताव था कि यदि निवेशक गंभीर रूप से बीमार या असमर्थ हो जाए तो उसका नॉमिनी खाते को संचालित कर सके। यह प्रावधान अभी लागू नहीं होगा।
बिना नॉमिनी वाले निवेशकों को मिलेंगे रिमाइंडर
जिन निवेशकों के डीमैट खाते या म्यूचुअल फंड फोलियो में नॉमिनी दर्ज नहीं है, उन्हें नॉमिनेशन के लिए समय-समय पर संदेश भेजे जाएंगे। डिपॉजिटरी और म्यूचुअल फंड के रजिस्ट्रार एवं ट्रांसफर एजेंट ऐसे निवेशकों को हर छह महीने में याद दिलाएंगे।
सेबी के इन बदलावों का उद्देश्य निवेशकों के लिए नॉमिनेशन प्रक्रिया को सरल बनाना और भविष्य में उनके निवेश को उत्तराधिकारियों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को आसान करना है।








